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तू हमेशा ही मुझमें रमी सी रही

जिन्दगी भर खुशी की कमी सी रही
इक परत सी गमों की जमी सी रही
....
ढोल बजते रहे शहर में हर तरफ
पर मेरे आशियाँ में गमी सी रही
....
चाहकर भी न भूला तेरे प्यार को
तू हमेशा ही मुझमें रमी सी रही
....
नींद आती भी आँखों में कैसे भला
आँखों में आसुओं की नमी सी रही
....
कोई दस्तक बजेगी मेरे द्वार पर
सोचकर साँस मेरी थमी सी रही

उमेश कटारा
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:27pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:27pm

आदरणीय  rajesh kumari जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:26pm

आदरणीय  Shyam Mathpal जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:26pm

आदरणीय  maharshi tripathi जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:25pm

आदरणीय   krishna mishra 'jaan'gorakhpuriजी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:25pm

आदरणीय Hari Prakash Dubey  जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:24pm

आदरणीय gumnaam pithoragarhi  जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:23pm

आदरणीय   ajay sharmaजी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:23pm

आदरणीय  khursheed khairadi जी शुक्रिया 

Comment by umesh katara on March 11, 2015 at 7:22pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी शुक्रिया 

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