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१२१ २२ १२२

अजीब है ये जिन्दगी

सलीब है ये जिन्दगी

न जान तू किस खता की

नसीब है ये जिन्दगी

इश्क जिसे है,उसी की

रकीब है ये जिन्दगी

गिने जु सांसे, बहुत ही

गरीब है ये जिन्दगी

निकाह मौत तुझसे औ

हबीब है ये जिन्दगी

‘मौलिक व अप्रकाशित’

Views: 578

Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on March 4, 2015 at 6:04pm

वाह भाई जी छोटी बहर में अच्छी कोशिश है  ज़िन्दगी  की  तक्तीअ  २१२ होगी

अजीब है ये जिन्दगी,,,,,,,, १२१  २२ २१२


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 4, 2015 at 3:49pm

संभवतः आपकी किसी पहली प्रस्तुति को देख रहा हूँ. बहुत अच्छा प्रयास हुआ है.

शुभकामनाएँ

इन मिसरों के तक्तीह फिर से करें तो समझ और बढ़ेगी -

अजीब है ये जिन्दगी
इश्क जिसे है,उसी की  और
निकाह मौत तुझसे औ

Comment by Shyam Narain Verma on March 4, 2015 at 3:30pm
अच्छी गजल के लिये बधाई
Comment by Pari M Shlok on March 4, 2015 at 1:38pm
अजीब है ये जिन्दगी

सलीब है ये जिन्दगी


न जान तू किस खता की

नसीब है ये जिन्दगी

वाह बहुत खूब ....

कृपया ध्यान दे...

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