For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक रचना,,,,,

(कुकुभ छंद और लावणी छंद का संधिक प्रयॊग)
**********************************

चॊर लुटॆरॆ निपट उचक्कॆ, चढ़ उच्चासन पर बैठॆ !
काली करतूतॊं सॆ अपनॆ, मुँह कॊ काला कर बैठॆ !!
राम भरॊसॆ प्रजातन्त्र की, अब भारत मॆं रखवाली !
जिसकॊ माली चुना दॆश नॆं,है काट रहा वह डाली !!

चीख रही हैं आज दिशायॆं,नैतिकता का क्षरण हुआ !!
चारॊ ऒर कपट कॊलाहल, सूरज का अपहरण हुआ !!१!!

अमर शहीदॊं  कॆ अब  सपनॆं, सारॆ चकनाचूर हुयॆ !
लॊकतन्त्र  की रबड़ी खा कर, मतवालॆ लंगूर हुयॆ !!
गाँधी की फॊटॊ कॆ पीछॆ,घात लगायॆ विषधर कालॆ !
भॊली भाली जनता इनकॊ, दूध पिलाकर कॆ पालॆ !!

आज झूठ कॆ दरवाजॆ पर, सत्य बिचारा शरण हुआ !!२!!

चारॊ ऒर कपट कॊलाहल, सूरज का अपहरण हुआ !!

मानव मूल्य गिरॆं नित नीचॆ, भ्रष्टाचार उठा ऊँचा !
अपनी अपनी डफली सबकी,अपना अपना है कूंचा !!
किससॆ कहॆं वॆदना मन की,अब कैसॆ भाग्य जगायॆं !
अन्धकार कॆ जंगल मॆं हम,अब कैसॆ आग लगायॆं !!

अच्छॆ दिन कॆ इंतज़ार मॆं,जीवन जैसॆ मरण हुआ है !!३!!

.चारॊ ऒर कपट कॊलाहल, सूरज का अपहरण हुआ !!

अब नमन शहीदॊं कॊ करना, कॆवल दस्तूर बना है !
भ्रष्टॊं कॆ पुतलॊं पर दॆखॊ,स्वर्णिम सा छत्र तना है !!
मँहगाई कॆ ताप-मान सॆ, बिलख रही भारत माता !
लाज बचानॆ भारत माँ की,काश यहाँ कान्हा आता !!

संविधान कॆ पन्नॊं पर बस, आज़ादी का वरण हुआ !!
चारॊ ऒर कपट कॊलाहल, सूरज का अपहरण हुआ !!४!!

"राज बुन्दॆली"
०९/०१/२०१५
मौलिक एवं अप्रकाशित,,,,

Views: 631

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 10, 2015 at 10:10pm

वाह वाह, बहुत खूब, सुन्दर, बधाई कवि राज.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 10, 2015 at 8:13pm

आदरणीय बुन्देली जी , बहुत अनुपम रचना हुई है , हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 10, 2015 at 5:59pm

सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय राज बुन्दॆली जी !

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 10, 2015 at 3:11pm

आदरणीय राज बुन्देली जी 

आज के सामाजिक अवमूल्यन पर बहुत सुन्दर छान्दसिक गीत प्रस्तुत हुआ है.. आपकी रचना धर्मिता हमेशा ही अपनी सार्थकता से आश्वस्त करती है.. बहुत बहुत बधाई स्वीकारिये 

कुछ बात अवश्य कहना चाहूंगी , शायद स्वीकार्य हो.. 

जिसकॊ माली चुना दॆश नॆं,है काट रहा वह डाली !! इस पदांश में गेयता बाधित है 

गाँधी की फॊटॊ कॆ पीछॆ,घात लगायॆ विषधर कालॆ ! ........१६-१४ की पंक्तियों में ये १६-१६ की पंक्ति भी प्रवाह बाधित कर रही है 

किससॆ कहॆं वॆदना मन की,अब कैसॆ भाग्य जगायॆं ! 
अन्धकार कॆ जंगल मॆं हम,अब कैसॆ आग लगायॆं !!.............यहाँ अगर , भाग्य जगाएं अब कैसे ....आग लगाएं अब कैसे ..किया जाएं तो?

अच्छॆ दिन कॆ इंतज़ार मॆं,जीवन जैसॆ मरण हुआ है ...........इस पंक्ति में 'है' अतिरिक्त टंकित हो गया शायद 

अब नमन शहीदॊं कॊ करना, कॆवल दस्तूर बना है ! 
भ्रष्टॊं कॆ पुतलॊं पर दॆखॊ,स्वर्णिम सा छत्र तना है !! ...इन दो पंक्तियों में भी अंतर्गेयता बाधित है..... शब्द समूहों में कल निर्वहन से शायद समाधान हो..

शुभकामनाएं 

Comment by somesh kumar on January 10, 2015 at 3:09pm

सुंदर अभिव्यक्ति पर बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 10, 2015 at 2:25pm

आ० राज  साहेब

बेहतरीन  i  16 ,14  काम्बीनेशन  i  लावनी ने इसे गीत जैसी सुन्दरता प्रदान की i  भाव भी उतने ही अच्छे i

Comment by Shyam Narain Verma on January 10, 2015 at 1:20pm
इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
6 hours ago
Admin posted discussions
6 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
7 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service