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 "  सच!  बहुत ही अच्छे इंसान थे  बल्लू भैया !!    क्षेत्रीय बैंक के अध्यक्ष पद पर  होते हुए उन्होंने सभी की बहुत मदद की , जो कोई भी पहचान वाला आकर अपनी समस्या बतलाता , उसे  कैसे न कैसे बैंक से आर्थिक मदद  दिलवा ही देते थे.  आज कई लोग तो उन्हीं की वजह से आबाद हुए बैठे है"

 

" हाँ भाई..!  उनकी माँ के  मर जाने के बाद आज उनका  अपना कोई भी तो नहीं.  देखा न !  पिछले वर्ष जब उनकी माँ की मृत्यु हुई थी तो बल्लू भैया के साथ-साथ सैकड़ों लोग सिर मुंडवाने को आगे आ गये और कहने लगे कि यह हम सबकी भी माँ थी,  लेकिन आज बल्लू भैया की मृत्यु पर ......."

 

   जितेन्द्र 'गीत'

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 11, 2014 at 9:33am

आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया पाकर बहुत प्रसन्नता हुई आदरणीय जवाहरलाल जी, आपका ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on May 10, 2014 at 10:02pm

बेहतरीन लघुकथा भाई जी। सतत लेखनरत रहें आप ओबीओ के नवरचनाकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनते जा रहे हैं। आपकी प्रगति अनुकरणीय है, हार्दिक बधाई।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 10, 2014 at 9:31pm

रचना पर आपकी उपस्थिति व् सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीया कल्पना जी, स्नेहिल आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 10, 2014 at 9:29pm

आपका विचार सर आँखों पर आदरणीय मुकेश जी किन्तु लघुकथा सोचने पर ही मजबूर करती हैं, आपकी प्रतिक्रिया हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by ram shiromani pathak on May 10, 2014 at 7:50pm

बहुत सुन्दर लघुकथा  आदरणीय भाई जी । ………।  हार्दिक बधाई आपको 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 9, 2014 at 8:55pm

सुर नर मुनि सब की यह रीति स्वारथ लागी करहिं सब प्रीति ....

सुन्दर लघुकथा ...

Comment by kalpna mishra bajpai on May 9, 2014 at 2:00pm

आ०जितेंद्र भाई सुंदर रचना

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 9, 2014 at 11:51am

आदरणीय जितेंद्र जी
अच्छी कथा है..अंत पाठक की कल्पना पर छोड दिया है समझना मुश्किल नहीं. पर लिखने से और स्पष्ट होता शायद. ये मेरा विचार भर है..सुझाव नहीं.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 9, 2014 at 10:37am

आपकी प्रतिक्रिया से बहुत संबल मिलता है आदरणीया मीना दीदी, स्नेह और आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 9, 2014 at 10:35am

आदरणीय नादिर साहब, रचना पर आपकी सराहना हेतु हृदयतल से आपका आभारी हूँ. स्नेह बनाये रखियेगा

सादर!

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