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उसे मजदूरी में जितने रूपये मिले थे उसकी रोटियाँ खरीदी और खाने के बाद दो रोटियाँ बचा ली, उसने सोचा कल पता नहीं काम मिले या नहीं, इतने में उसकी नज़र एक बच्चे पर पड़ी वो उन रोटियो की तरफ कातर दृष्टि से देख रहा था। उसे दया आ गई, उसने रोटियाँ उस बच्चे को दे दी।

 

उधर -  एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में शादी थी मेहमानों के चले जाने के बाद काफी खाना बच गया था इतना कि कम से कम 20 भूखे पेट भर सकते थे। मेजबान से पूछा गया इस खाने का क्या करें ? ……………?

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 6, 2014 at 5:54pm

रचना को समय देने के लिये आप सभी का हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 6, 2014 at 1:04pm

आदरणीय शिज्जू भाई , दोनो परिस्थियों को एक के बाद एक पढ कर सच मे मन मे एक सवाल उठ खड़ा होता है !! बहुत सुन्दर , बधाइयाँ ॥

Comment by coontee mukerji on April 6, 2014 at 12:32pm

कितना फ़र्क है......

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on April 6, 2014 at 10:17am

जायज सवाल है।

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