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तेरी खातिर मुस्कुराना चाहता हूँ- ग़ज़ल

2122- 2122- 2122

दिल से निकले वो तराना चाहता हूँ

इक मसर्रत का फसाना चाहता हूँ                       (मसर्रत =खुशी)

 

देख कर मुझको छलक जायें न आँसू

तेरी खातिर मुस्कुराना चाहता हूँ

 

जी लिया मैंने बहुत बचते हुये अब

मुश्किलों को आजमाना चाहता हूँ

 

बेझिझक मै पत्थरों के शह्र जाके

उनको आईना दिखाना चाहता हूँ

 

सुब्ह की चुभती हुई इस धूप को मैं

अपनी आँखों से हटाना चाहता हूँ

 

हर ख़लिश को ओढ़कर कुछ देर को मैं

ख़्वाब में ही डूब जाना चाहता हूँ

 

दिन दिखाये थे मुझे हालात ने जो

मैं तुम्हें उससे बचाना चाहता हूँ

 

चल सको आराम से तुम सो तुम्हारे

रास्ते आसाँ बनाना चाहता हूँ

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by शिज्जु "शकूर" on March 28, 2014 at 9:28am

आदरणीय सौरभ सर आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 28, 2014 at 12:59am

भाई शिज्जूजी,  इस उम्दा ग़ज़ल के लिए दाद कुबूल कीजिये.

बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 27, 2014 at 7:26am

आदरणीया डॉ प्राची जी रचना की सराहना के लिये आपका तहेदिल से शुक्रिया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 26, 2014 at 9:50pm

जी लिया मैंने बहुत बचते हुये अब

मुश्किलों को आजमाना चाहता हूँ

हर ख़लिश को ओढ़कर कुछ देर को मैं

ख़्वाब में ही डूब जाना चाहता हूँ

इन दो शेरों के साथ ही और भी कई अशआर बहुत करीब लगे 

हार्दिक बधाई इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए आ० शिज्जू जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 24, 2014 at 8:59pm

आदरणीया वंदना जी रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 24, 2014 at 8:58pm

आदरणीय वीनस भाई आपका हार्दिक आभार

Comment by वीनस केसरी on March 24, 2014 at 12:59am

शिज्जू साहब ग़ज़ल के लिए ढेरो दाद
अरूज़ के हवाले से भी ग़ज़ल ने बेहद मुतासिर किया

Comment by vandana on March 23, 2014 at 7:17am

हर ख़लिश को ओढ़कर कुछ देर को मैं

ख़्वाब में ही डूब जाना चाहता हूँ

 

दिन दिखाये थे मुझे हालात ने जो

मैं तुम्हें उससे बचाना चाहता हूँ

 

चल सको आराम से तुम सो तुम्हारे

रास्ते आसाँ बनाना चाहता हूँ

बहुत बढ़िया अशआर आदरणीय 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 23, 2014 at 6:33am

आदरणीया शशिजी आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 23, 2014 at 6:33am

आदरणीया राजेश दीदी रचना की सराहना के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया

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