For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आया लो फागुन का मौसम

     आया लो फागुन का मौसम

 

आया लो फागुन का मौसम, मुझको पागल हो जाने दो !

वासंती  बयार ने  तेरे -

कोमल कुंतल को बिखराए,

गजब ढा रही तेरी बिंदिया-

गालों पर फागुन छा जाये ।

तेरा बदन गुलाल हुआ , अपनी ज़ुल्फों मे खो जाने दो

आया लो फागुन का मौसम, मुझको पागल हो जाने दो !

फागुन के मौसम मे तुम पर

फूलों की  बरसात  हुयी  है,

अंग अंग फागुनी हुआ ,और –

कामदेव  की  दुआ हुयी  है।

कैसे संयम करूँ प्रिये !  अब जो होता है , हो जाने दो-

आया लो फागुन का मौसम, मुझको पागल हो जाने दो !

पल्लू से मुखड़े को ढँक  लो

आज न  मै  तुमको छोड़ुंगा,

तुम  भागोगी  जहां जहां भी –

पीछे - पीछे   मैं   दौडुंगा ।

होली मे थक कर  चूर हुआ, अपनी बाहों मे सो जाने दो

आया लो फागुन का मौसम, मुझको पागल हो जाने दो !

       --------  मौलिक और अप्रकाशित ----------

Views: 489

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by S. C. Brahmachari on April 2, 2014 at 9:48pm
हार्दिक आभार डॉ0 प्राची जी । समय मिले तो व्याकरणिक त्रुटियों पर इशारा कर सकें । एक अन्य रचना - सखि रि ! फागुन .... पर आपकी प्रतिक्रिया वांछित है ....सादर ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 1, 2014 at 5:33pm

फाल्गुल के असर पर सुन्दर शृंगारिक रचना हुई है आ० ब्रह्मचारी जी 

कहीं कहीं व्याकरणिक त्रुटियाँ दिख रही हैं उन पर अवश्य ही गौर करें 

इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

सादर.

Comment by S. C. Brahmachari on March 25, 2014 at 2:46pm

फागुनी रचना की बधाई के लिए हार्दिक आभार श्री जितेंद्र `गीत` जी ! 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 22, 2014 at 8:15am

बहुत सुंदर,भावपूर्ण रचना बधाई स्वीकारें आदरणीय ब्रह्मचारी जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
9 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
11 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
21 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service