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सात दोहे – '' रिश्ते ''

*******    ******

नाराजी जो है कहीं , मिल के कर लो बात

खामोशी  देती  रही , हर  रिश्ते  को मात

 

रिश्तों  को  भी चाहिये , इन्जन जैसे तेल

बिना  तेल  देखे बहुत , झटके खाते मेल                            

 

तेरा  घोड़ा  तेज़  है , माना  मेरा  सुस्त

देखो  रिश्ता  हो  गया , पहले जैसे चुस्त

 

तू  माने  खुद को बड़ा , तो मैं भी हूँ शेर

बढ़ने  में  अब  दूरियाँ , नहीं लगेगी  देर

 

आपस की  कमियाँ भरें , यारी की  ये रीत

यही बढ़ाती  है  सदा , हर  नाते  में प्रीत

 

हाथ मिला के कब हुआ, मन से मन का मेल

ये भावों की बात है , ये अन्दर का खेल

 

मैं जैसा भी हूँ अभी , जो कर ले स्वीकार

उसकी सारी ग़लतियों, से मुझको भी प्यार   

***********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 3, 2014 at 5:38pm

आदरणीय भुवन निस्तेज भाई , दोहों की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ॥

Comment by भुवन निस्तेज on March 31, 2014 at 7:58am

हाथ मिला के कब हुआ, मन से मन का मेल

ये भावों की बात है , ये अन्दर का खेल 

Respected sir highly enlightened words...Great!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 27, 2014 at 3:51pm

आदरणीय अरुण अनंत भाई , दोहों की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिये आपका शुक्रिया !!

Comment by अरुन 'अनन्त' on March 27, 2014 at 2:00pm

आदरणीय गिरिराज सर बहुत सुन्दर दोहावली रची है आपने एक एक दोहा सन्देशपरक है मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 24, 2014 at 6:17pm

आदरणीय हेमंत भाई , आपका बहुत आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 24, 2014 at 6:16pm

आदरनीय सौरभ भाई , दोहों की सराहना स्वरूप आपके दोहे के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by hemant sharma on March 23, 2014 at 10:37am
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी महीने की श्रेष्ठ रचना चुने जाने के लिये आपको हार्दिक् बधाई.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 10:48pm

बहुत सुन्दर !

सम्बन्धों की वादियाँ, लिये छाँव औ’ धूप
दिखलाया गिरिराज ने, इनका नाजुक रूप

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2014 at 5:48pm

आ. आकाश वर्मा भाई , दोहों को आपका अनुमोदन मिला , बड़ी खुशी हुई , आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2014 at 5:46pm

आ.लक्ष्मण भाई , आपका बहुत शुक्रिया ॥

कृपया ध्यान दे...

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