For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज मौन उपवास रहा है ..........

अब तक  तेरे पास रहा है
नतीज़तन वो  ख़ास रहा है

हिचकी , हिचकी केवल हिचकी
वोआज मौन उपवास रहा है

छुयन का उसकी असर ये देखो
पतझड़ में मधुमास रहा है

मेरा ख्वाब है उसके दिल में
मुझको  ये  अहसास रहा है

कभी है गहना हया ये उसकी
कभी "अजय" लिबास रहा है

मौलिक व अप्रकाशित
अजय कुमार शर्मा

Views: 663

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ajay sharma on December 27, 2013 at 11:19pm

pathak ji .....typing mistake ho gaya  ...apne sahi pakda ..hai ....chhyan ...nahi  yah chhuvan hi hoga ...thanks 

Comment by ajay sharma on December 27, 2013 at 11:17pm

pandey sir .......yadi isi rachna ko ...matra badhh kar de badi kripa kar  de .....matra gadna kaise kari jaye ....agli  baar mai khud koshish karoonga ......pl......


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 27, 2013 at 10:36pm

फेलुन फेलुन .. फ़ा पर मिसरों को बाँधिये अजयभाईजी.  बहुत ही अच्छी कोशिश हुई है.

बहुत-बहुत बधाई ..

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 27, 2013 at 1:47pm

अच्छी  रचना के लिए शुभ - कामनाये i

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 27, 2013 at 9:38am

छुयन का उसकी असर ये देखो
पतझड़ में मधुमास रहा है.........बहुत कोमल अहसास

खुबसूरत रचना पर बधाई स्वीकारें आदरणीय अजय जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 8:07am

आदरणीय अजय भाई , बहुत खूबसूरत रचना हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by coontee mukerji on December 27, 2013 at 3:01am

छुयन का उसकी असर ये देखो
पतझड़ में मधुमास रहा है

मेरा ख्वाब है उसके दिल में
मुझको  ये  अहसास रहा है.....बहुत सुंदर.

Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2013 at 12:42am

सुन्दर प्रस्तुति भाई अजय जी। .. बधाई /////छुयन??????

Comment by कल्पना रामानी on December 26, 2013 at 8:09pm

कभी है गहना हया ये उसकी
कभी "अजय" लिबास रहा है...सुंदर भावपूर्ण गजल, हार्दिक बधाई आपको

Comment by MAHIMA SHREE on December 26, 2013 at 7:45pm

हिचकी , हिचकी केवल हिचकी
वोआज मौन उपवास रहा है ...... बहुत खूब आदरणीय अजय जी .. बधाई आपको सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service