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क्या हो अगर शख़्स वो भगवान हो जाए

वो भी इक , अगर बे-ईमान हो जाए 
ये बस्ती उम्मीद की , वीरान हो जाए

इबादतगाह बन जाए , ये दुनिया सारी 
हर इक आदमी अगर इंसान हो जाए

झुग्गियों की क़िस्मत भी जगमगा उठे 
इक खिड़की भी अगर , रोशनदान हो जाए 

फ़िज़ायों में इबादतपसंद है , कोई ज़रूर 
वरना ऐसे ही नहीं , कोई अज़ान हो जाए

साल-ये-नौ पर , दुआ है मेरी , ये दोस्त 
तेरी ख्वाहिशों को , अता आसमान हो जाए 

वे मुंतज़िर हैं, ज़ंहूरियत में भी "अजय" 
कब सियासत , इक खानदान हो जाए 

उसने कर रखे हैं चराग़ रोशन ख़ून से अपने 
क्या हो , अगर शख़्स वो , भगवान हो जाए 

मौलिक व अप्रकाशित 
अजय कुमार शर्मा

Views: 473

Comment

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Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 4, 2014 at 8:42pm
सुन्दर रचना है अजय जी! मेरे हिसाब से गजल होना चाहिये। इसे लेकिन यदि बह्र और गजल का तक्तिआ भी लिखा जाता तो अतिउत्तम होता।
एक नेक रचना के लिये बधाई।
Comment by ajay sharma on December 27, 2013 at 11:24pm

......saurabh pandey sir ,rana sir , shijju sir ,prachi di aur sabhi bado ka ashish mil jata  too....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 8:14pm

आदरनीय अजय भाई , सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये बधाई ॥

Comment by MAHIMA SHREE on December 27, 2013 at 7:40pm

इबादतगाह बन जाए , ये दुनिया सारी 
हर इक आदमी अगर इंसान हो जाए

झुग्गियों की क़िस्मत भी जगमगा उठे 
इक खिड़की भी अगर , रोशनदान हो जाए 

साल-ये-नौ पर , दुआ है मेरी , ये दोस्त 
तेरी ख्वाहिशों को , अता आसमान हो जाए ... वाह बहुत खूब ..आ. अजय शर्मा जी बहुत -२ बधाई

Comment by Shyam Narain Verma on December 27, 2013 at 4:42pm
इस खूबसूरत रचना के लिये दिली दाद कुबूल करें...
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 27, 2013 at 3:05pm

अजय  जी

बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही आपने  i

बधाई हो i

Comment by coontee mukerji on December 27, 2013 at 12:33pm

साल-ये-नौ पर , दुआ है मेरी , ये दोस्त 
तेरी ख्वाहिशों को , अता आसमान हो जाए.......आमीन.

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