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स्कूटर पर जाती महिला

स्कूटर पर जाती महिला

का सड़क से गुज़रना  हो

या  गुज़रना हो

काँटों भरी संकड़ी गली से ,

दोनों ही बातें

एक जैसी ही तो है।

लालबत्ती पर रुके स्कूटर पर

बैठी महिला के

स्कूटर के ब्रांड को नहीं देखता

कोई भी ...

देखा जाता है तो

महिला का फिगर

ऊपर से नीचे तक

और बरसा  दिए जाते हैं फिर

अश्लील नज़रों के जहरीले कांटे ..

काँटों की  गली से गुजरना

इतना मुश्किल नहीं है

जितना मुश्किल है

स्कूटर से गुजरना ...

कांटे  केवल देह को ही छीलते है

मगर

हृदय तक बिंध जाते है

अश्लील नज़रों के जहरीले कांटे ...

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 22, 2013 at 4:49pm

आदरणीया , आज से समाज की ज्वलंत बुराई को आपने शब्द दिया है । आपको रचना के लिये बधाई ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 21, 2013 at 11:16am

बहुत गंभीर ज्वलंत मुद्दे को केन्द्रित कर लिखी गई इस प्रस्तुति के लिए आपको शत शत बधाई

कांटे  केवल देह को ही छीलते है

मगर

हृदय तक बिंध जाते है

अश्लील नज़रों के जहरीले कांटे ...-----हर नारी की पीड़ा को शब्द बद्ध किया है  आपने इस रचना में .

 

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