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श्याम जैसी वो साँवरी होगी : अरुन शर्मा 'अनन्त'

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
2122  1212  22


खूबसूरत हँसी परी होगी,
सोचता हूँ जो जिंदगी होगी,

सादगी कूटकर भरी होगी,
श्याम जैसी वो साँवरी होगी,

 

ख्वाहिशें क्यूँ भला अधूरी हैं,
मांगने में कहीं कमी होगी,

ख़त्म कर लें विवाद आपस का,
मैं गलत हूँ कि तू सही होगी,

 

मौत ने खा लिया बता देना,

जिस्म में जान जब नही होगी,

शांत चुपचाप दोस्त रहने दो,
सत्य बोलूँगा खलबली होगी....

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 4:50pm

हार्दिक आभार आदरणीय गुरुदेव श्री आशीष एवं स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 4:49pm

आदरणीया राजेश माँ जी आपका आशीष मिला ग़ज़ल पूर्ण हुई आशीष एवं स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 4:48pm

हार्दिक आभार भाई नीरज मिश्र प्रेम जी प्रेम यूँ ही बना रहे भाई

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 4:45pm

आदरणीया प्राची दीदी ग़ज़ल आपको पसंद आई जानकर प्रसन्नता हुई आपका आशीष मिला मैं धन्य हुआ आशीष एवं स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 4:44pm

वाह वाह आदरणीय गिरिराज सर आपके स्नेह से अभिभूत हूँ स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 4:43pm

हार्दिक आभार आदरणीय संदीप भाई साहब स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 6, 2013 at 10:52pm

सुंदर ग़ज़ल ... बधाई ...हर शेर जम रहा है ..मतले में हँसी को हसीं कर लें ...
सादर 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on December 6, 2013 at 10:38pm

प्रिय अनंत जी शानदार दमदार गजल के लिए बधाइयां गिरिराज भाई की ख़ास गजल आप के लिए
जानदार है

आभार
भ्रमर ५


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on December 6, 2013 at 9:26pm

छोटी बहर की शानदार जानदार ग़ज़ल के लिए बधाईयाँ, 

ख्वाहिशें क्यूँ भला अधूरी हैं,
मांगने में कहीं कमी होगी,
इस अश'आर पर खासतौर से दाद स्वीकारें...................

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 6, 2013 at 8:26pm
ख्वाहिशें क्यूँ भला अधूरी हैं,
मांगने में कहीं कमी होगी,----लाजबाब शेर ,वैसे पूरी ग़ज़ल ही शानदार है बहुत खूब दाद कबूलें प्रिय अरुन शर्मा  जी 

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