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बात क्या है जो रात भारी है : अरुन शर्मा 'अनन्त'

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
2122 1212 22

बात क्या है जो रात भारी है,
इश्क है या कोई बिमारी है,

जान लेती रही हमेशा पर,
याद तेरी बहुत दुलारी है,

मौत से डर के लोग जीते हैं, 
जिंदगी ये ही सबसे प्यारी है,

हुस्न कातिल सही सुनो लेकिन,
सादगी फूल सी तुम्हारी है,

हाथ खाली ही लेके जायेगा,
जग से राजा भले भिखारी है....

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:44pm

आदरणीय सारथी भाई जी आपकी टिपण्णी पा कर दिल खुश हो गया हार्दिक आभार आपका.

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:43pm

हार्दिक आभार भाई नीरज मिश्रा प्रेम जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:42pm

शुक्रिया निलेश जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:42pm

हार्दिक आभार हेमंत भाई जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:42pm

अनुज राम

हाथ खाली ही लेके जायेगा,
जग से राजा भले भिखारी है.//////////////////////भाई यहाँ कुछ कम समझ पाया मै .. काहे भाई कम काहे समझे आप स्पष्ट तो लिखा है . 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:41pm

हार्दिक आभार तपन जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:41pm

हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज सर

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 5, 2013 at 4:40pm

हार्दिक आभार आदरणीया सरिता जी

Comment by Meena Pathak on December 5, 2013 at 3:37pm

हाथ खाली ही लेके जायेगा,
जग से राजा भले भिखारी है........ क्या बात है .. बहुत सुन्दर गज़ल हुई आ०अरुन जी बधाई स्वीकारें | सादर 

Comment by Saarthi Baidyanath on December 5, 2013 at 1:25pm

बात क्या है जो रात भारी है, 
इश्क है या कोई बिमारी है....बेजोड़ ,बस क्या कहने !..

हुस्न कातिल सही सुनो लेकिन, 
सादगी फूल सी तुम्हारी है........ नजाकत से लबरेज ...वाह अरुन साहिब ..कमाल की ग़ज़ल कही है ..! बहुत खूब

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