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मौन के शव  ?

बोलते चुपचाप

बात करते आप

रौंदते है मूक अन्तस को

बधिर होता है हाहाकार

दग्ध पर नहीं होते वो

ध्वंस लेता है फिर आकार

यही होता है प्रकृति में 

भावनाओ की विकृति में

सतत क्रम सा बार बार

सभी है सहते उसे

और हाँ कहते उसे

निष्ठुर प्रेम ! 

 

 

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 10, 2013 at 12:00pm

डॉ आशुतोष मिश्र जी

बहुत बहुत आभार  i  सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 10, 2013 at 11:59am

आदरनीय  सौरभ जी

सादर---- सादर----- सादर-----

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 10, 2013 at 11:25am

आदरणीय गोपाल सर ..अत्यंत गूढ़ भावों को व्यक्त करती गहन और सुंदर रचना के लिए तहे दिल बधाई ...सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 7, 2013 at 9:16pm

दो स्टूडेण्ट मिल कर क्या कमाल नहीं कर सकते.. :-)))))))

हम साथ-साथ हैं !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 7, 2013 at 9:07pm

आदरणीय सौरभ जी

चातक को स्वाति बिंदु मिलने पर शायद वह तृप्ति न मिलती हो जितनी आपके आशीर्वाद से मुझे मिली i  मुझे आपकी दीक्षा मिलती रहे और मै आपकी कसौटी  पर खरा उतरने का प्रयत्न करता रहूँ  i एक स्टूडेंट के लिया इससे बढ़कर क्या है  ?

सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 7, 2013 at 8:59pm

सावित्री राठौर जी

आपका आभार i

सादर ii


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 7, 2013 at 7:42pm

आदरणीय गोपालजी, आपकी इस प्रस्तुति की अनुगूँज देर तक बनी रही.
कार्मिक रूप से स्थावर हो गये एक भौतिक स्वरूप की मनोदशा को मिले शब्द वस्तुतः प्रभावकारी हैं. भारतीय सनातन मान्यताओं के अनुरूप ही प्रतीत हो रहे ध्वंसावशेष से सुगढ़ता और निरंतरता की सकारात्मक अपेक्षा इसके पाठकों को आश्वस्त करती है.

बड़ा अच्छा लगा कि आपकी प्रस्तुत रचना एक गहन एवं गूढ़ प्रतीत होते-से विषय को आवश्यक कथ्यात्मकता के साथ सरलता से साझा कर रही है.

हार्दिक बधाई, आदरणीय

Comment by Savitri Rathore on December 1, 2013 at 9:49pm

सुन्दर एवं सटीक अभिव्यक्ति ....... बधाई हो !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2013 at 7:51pm

अनंत जी

आपकी  प्रीति  और रीति  का सादर आभारी हूँ  i

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 1, 2013 at 4:12pm

आदरणीय घाव करे गंभीर वाली बात कही है आपने बहुत ही गूढ़ भाव लिए शानदार अभिव्यक्ति बहुत बहुत बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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