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कभी आत्ममन्थन करना -- मीना पाठक

दिए दिन, महीने, बरस
जीवन के अनमोल पल
तुम्हारी तल्खियों से
आहत जख्मों को छुपा
मुस्कान की सौगात दी
कोमल भावनाएं
इच्छाओं की आहूति दी
कायम रखी
तुम्हारी मिल्कियत
वजूद को मिटा कर
फिर भी
तुम छीनते रहे मुझसे
मेरे हिस्से का वक्त
तुम्हें मंजूर नही
मेरा खुद के लिए
जीना
तृप्त ना हो सकीं
तुम्हारी इच्छाएं
छीन लेना चाहते हो
मेरा आस्तित्व
मेरी अभिलाषाएं
मेरा सब कुछ
हक से लेने वाले
कभी सोचा
तुमने मुझे क्या दिया ?
कभी आत्ममन्थन करना !!   

मीना पाठक
 
मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 788

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 30, 2013 at 10:19am

तुम छीनते रहे मुझसे 
मेरे हिस्से का वक्त 
तुम्हें मंजूर नही 
मेरा खुद के लिए
जीना 

छीन लेना चाहते हो 
मेरा आस्तित्व 
मेरी अभिलाषाएं
मेरा सब कुछ .

....................पर मैं हार नहीं सकती, क्योंकि "औरत हूँ मैं "

गहन संवेदनाओं की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति पर बहुत बहुत बधाई आदरणीया मीना जी ...बहुत सुन्दर 

Comment by Meena Pathak on October 25, 2013 at 2:33pm

आदरणीय विजय मिश्र जी रचना को इतनी गहराई से समझने के लिए हृदयतल से आभार 

Comment by Meena Pathak on October 25, 2013 at 2:31pm

परम आदरणीय विजय निकोर जी, सादर प्रणाम 
आप का स्नेह मेरी रचना पर टिप्पणी रूप में यूँ ही मिलता रहे , सादर आभार 

Comment by Meena Pathak on October 25, 2013 at 2:29pm

आदरणीय सुशील जोशी जी हार्दिक आभार स्वीकारें 

Comment by Meena Pathak on October 25, 2013 at 2:28pm

प्रिय राम शिरोमणि जी बहुत आभार 

Comment by Meena Pathak on October 25, 2013 at 2:28pm

आदरणीय  आशुतोष जी बहुत बहुत आभार स्वीकारें | सादर 

Comment by विजय मिश्र on October 25, 2013 at 12:25pm
प्रबुद्धों की निजता का हनन उनके आत्मा पर प्रहार करती है , बारम्बार अपने अस्तित्व के मूल्याँकन को बिवश करती है ,कुरेदती है मन को जब अंतर्मन की तृषा को मित्र न समझे . सबकुछ बेमानी लगने लगता है . कुछ इन्हीं भावों को मेरी नजरों ने यहाँ पाया .साधुवाद मीनाजी एक भावभरी रचना केलिए .
Comment by vijay nikore on October 25, 2013 at 12:15pm

//मेरा सब कुछ
हक से लेने वाले
कभी सोचा
तुमने मुझे क्या दिया ?//

बहुत ही सुन्दर रचना है, बधाई।

Comment by Sushil.Joshi on October 25, 2013 at 4:35am

भावों को बखूबी पिरोया है आपने इस रचना में आ0 मीना जी...... बधाई हो...

Comment by ram shiromani pathak on October 24, 2013 at 9:29pm

आदरणीया मीना जी,बहुर सुन्दर  अभिव्यक्ति !!! आपको बधाई !!!!

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