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राह आसां नहीं है उल्फत की

२१२२     १२१२     २२

जिंदगी और इम्तिहान न ले

कुछ भी ले ले मेरा गुमान न ले 

मशविरा है यही फकीरों का  
यूं कभी दी हुई ज़बान न ले  


राह आसां नहीं  है उल्फत की

नन्हे से दिल मे आसमान न ले

चल खिलोनों से खेलते हैं हम

तू अभी हाथ में कृपान न ले 

जो पड़ोसी है मुल्क उसको बता  
असलहों से भरी दुकान न ले

खुल के जी खुद भी, सब को दे जीने  

अपनी मुट्ठी मे तू जहान न ले  

जिन की झोली में बस दुआयें हों  

उन फकीरों से उन की आन न ले

मौलिक एवं अप्रकाशित 

डॉ आशुतोष मिश्र 

Views: 1008

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 22, 2013 at 9:51pm

आदरणीय शिज्जू भाई , आपका बहुत शुक्रिया , जानकारी केलिये !!!!!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 22, 2013 at 9:37pm

//इस बह्र मे 112 को 22 किया जा सकता है नही मुझे नही मालूम//

डॉ.आशुतोष को यह सलाह दी जा चुकी है कि अपनी ग़ज़ल को पोस्ट करते समय मिसरों का वज़्न दे दिया करें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 22, 2013 at 8:56pm

//जिंदगी और इम्तिहान न ले

कुछ भी ले ले मेरा गुमान न ले //  बहुत बढ़िया 

आदरणीय डॉ आशुतोष जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने दिली दाद कुबूल करें,

आदरणीय गिरिराज जी इस बह्र में 112 या 22 दोनों ही सही है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 22, 2013 at 8:30pm

आदरणीय बहुत शानदार गज़ल कही है , पूरी गज़ल के लिये आपको ढेरों दाद !!!!! ( इस बह्र मे 112 को 22 किया जा सकता है नही मुझे नही मालूम )

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on October 22, 2013 at 6:59pm

वाह वाह क्या बात है जनाब

बेहतरीन ग़ज़ल हुई है

इस ग़ज़ल के लिए दिली दाद हाजिर हैं क़ुबूल करें

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 22, 2013 at 6:58pm

आदरणीय केवल जी ..हौसला अफजाई के लिए तहे दिल शुक्रिया ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 22, 2013 at 6:58pm

आदरणीय अभिनव जी ..आपके स्नेहिल शब्दों के लिए तहे दिल धन्यवाद ..सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 22, 2013 at 6:42pm

आदरणीय आशुतोष भार्इ जी!  सादर प्रणाम!  वाह! बेहद सुन्दर गजंल। तहेदिल से दाद कुबूल करे।   सादर,

Comment by Abhinav Arun on October 22, 2013 at 2:27pm

जिन की झोली में बस दुआयें हों

उन फकीरों से उन की आन न ले

.लाजवाब बेहतरीन डाक्टर आशुतोष जी ..पूरी ग़ज़ल सामयिक संदेशो से परिपूर्ण , हार्दिक बधाई स्वीकारे !!

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