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जाने किस आशंका से
त्रस्त मन /
झंझावात मे
नन्हा सा दिया /
अब बुझा कि तब बुझा /
अर्थहीन शब्दों के सहारे
घिसटती ज़िन्दगी
क्या यही है ?
किम्वदन्ति बन गई है
तथागत को मिली शान्ति /
आत्म मंथन करने पर
कालिख ही कालिख हाथ लगी /
दोषारोपण सवेरो पर ,
सूरज की किरणे
किसी अंधी गली में सोई मिली ।

मौलिक एवं अप्रकाशित
अरविन्द भटनागर 'शेखर'

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 30, 2013 at 10:06am

ज़िंदगी की सतहीयता व खोखलेपन से उपजे नैराश्यपूर्ण भाव मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत हुए हैं 

आत्म मंथन करने पर 
कालिख ही कालिख हाथ लगी /..........यानि अपनी ही गलतियों का एहसास होना 
दोषारोपण सवेरो पर,..................फिर सवेरों पर दोषारोपण क्यों ?...ये समझ नहीं आया 
सूरज की किरणे 
किसी अंधी गली में सोई मिली..................सुन्दर ..हृदयभेदी पंक्ति 

हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 9:30pm

बेहद गहन एवं भावपरक अभिव्यक्ति है आ0 अरविन्द जी..... बधाई....

Comment by ARVIND BHATNAGAR on October 24, 2013 at 8:27pm

आदरणीय  जितेन्द्र जी  , डाo आशुतोष मिश्र जी  आपको रचना पसंद आई बहुत आभार । 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 24, 2013 at 3:49pm
आदरणीय अरविन्द जी इस सुंदर रचना पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई ..सादर
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 24, 2013 at 9:39am

आत्म मंथन करने पर
कालिख ही कालिख हाथ लगी /
दोषारोपण सवेरो पर ,
सूरज की किरणे
किसी अंधी गली में सोई मिली ।

बेहद सुंदर भाव, अति गहराई से उभरे हुए, बहुत बहुत बधाई आदरणीय अरविन्द जी

Comment by ARVIND BHATNAGAR on October 24, 2013 at 9:08am

आदरणीय गिरिराज भाई , आदरणीय राम शिरोमणि जी उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 23, 2013 at 10:00pm

आदरणीय अरविन्द भाई , सुन्दर अभिव्यक्ति , सुन्दर प्रस्तुति के लिये आपको बधाई !!!!!!

Comment by ram shiromani pathak on October 23, 2013 at 8:19pm

सुन्दर  प्रस्तुति  हार्दिक बधाई आपको //सादर

Comment by ARVIND BHATNAGAR on October 23, 2013 at 8:08pm

aadarniya Meena ji , aadarniya arun ji , bahut bahut dhanyawad

Comment by Meena Pathak on October 23, 2013 at 6:53pm

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति बधाई आप को

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