For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्यों बे साले तेरी ये मजाल ... दो टके का मजदूर हो के मुझसे ज़बान लड़ाता है !

साहेब, गरियाते काहे हैं, मजदूर तो आपौ हैं  

क्या बकता है हरामखोsss

माई बाप ... पिछले हफ्ता एक मई का आपै तो कहे रहेन ,,, "हम सब मजदूर हैं"  

(मौलिक व अप्रकाशित) 

 

Views: 1088

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 17, 2013 at 8:54pm

मंच पे खड़े हो कर एकता के नारे लगाना , लुभावने भाषण देना एक बात है और कथ्य को मन से महसूस कर कथ्यानुरूप आचरण भी होना बिलकुल ही अलहदी बात!

बहुत ही सुगठित और कम शब्दों में स्पष्ट सन्देश देती सार्थक लघुकथा 

सादर बधाई आ० वीनस जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 6:17pm

वीनस भाई, इस लघुकथा के माध्यम से अत्यंत शाब्दिक और परले दर्ज़े के स्वार्थी दलालों की पूरी कलई खोली गयी है जो ’हम मज़दूर हैं..’ की मुट्ठी-भींचीं चीखों की ओट में असली खेल खेलते हुए राजनीति कर रहे हैं. उन्हें अपनी संज्ञा में मज़दूर शब्द तो मांगता है, लेकिन मज़दूर का कर्म और मज़दूर का जीवन नहीं.

बहुत ही सार्थक प्रस्तुति हुई है. आपकी कम ही लघुकथाएँ हमने देखी हैं. लेकिन जितनी देखी हैं वे सामान्य स्तर से बहुत ऊँची हैं. और उनके लिहाज़ और नज़रिये का विस्तार अवश्य ही बड़ा है.  
दिल से बधाई स्वीकारें

Comment by बृजेश नीरज on October 15, 2013 at 2:09pm

हा हा हा ......औपचारिकता में कह दी गयी बातें कहाँ याद रहती हैं!

बहुत सुन्दर कटाक्ष! आपको हार्दिक बधाई!

सादर!

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 4:58am

वाह वाह वीनस भाई.... सचमुच इस लघु कथा ने बता दिया कि ज़्यादा लिखना मायने नहीं रखता..... वरन् मायने रखता है तो केवल वह बात, भाव या प्रहार जो कम शब्दों के बावजूद पूर्णत: पाठक या श्रोता के मन तक पहुँच जाए एवं उसे झकझोर कर रख दे..... इस सुंदर लघु कथा के लिए बधाई स्वीकारें.....

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 14, 2013 at 10:28pm

मालिक गाली का प्रयोगकर रौब जमा रहा था, मजदूर  ने सुंदर शब्द से उसकी औकात बता दी । बधाई वीनस भाई । 

Comment by MAHIMA SHREE on October 14, 2013 at 10:04pm

वाह बहुत ही बढ़िया ... हार्दिक बधाई आपको

Comment by Sarita Bhatia on October 14, 2013 at 8:15am

बहुत संक्षेप में कटाक्ष कह गए ,बधाई 

Comment by vandana on October 14, 2013 at 6:58am

बहुत बढ़िया तरीके से आपने दोगलेपन पर कटाक्ष किया है आदरणीय सर 

Comment by वीनस केसरी on October 14, 2013 at 1:02am

आप सभी का हार्दिक आभारी हूँ

मित्रों
कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने पहली बार मेरी कोई लघुकथा पढ़ी है सभी से निवेदन है कि मैंने कुछ लघुकथाएं पहले भी ओबीओ पर पोस्ट की है, समय मिले तो मेरी पुरानी पोस्ट पर आईयेगा  ...
सादर

Comment by कल्पना रामानी on October 13, 2013 at 10:28pm

बहुत कम शब्दों में अर्थपूर्ण कथन...अति सुंदर! लघुकथाएँ वैसे भी बहुत भाती हैं, पर कसी हुई शैली की बात ही और होती है।

बहुत बहुत बधाई आपको वीनस जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on मिथिलेश वामनकर's blog post ग़ज़ल: उम्र भर हम सीखते चौकोर करना
"वाह बहुत खूबसूरत सृजन है सर जी हार्दिक बधाई"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की 14वीं सालगिरह का तुहफ़ा"
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, आमीन ! आपकी सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत शुक्रिय: अदा करता हूँ,सलामत रहें ।"
Wednesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 166 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का…See More
Tuesday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 155

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ पचपनवाँ आयोजन है.…See More
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"तकनीकी कारणों से साइट खुलने में व्यवधान को देखते हुए आयोजन अवधि आज दिनांक 15.04.24 को रात्रि 12 बजे…"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, बहुत बढ़िया प्रस्तुति। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई। सादर।"
Sunday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"आदरणीय समर कबीर जी हार्दिक धन्यवाद आपका। बहुत बहुत आभार।"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"जय- पराजय ः गीतिका छंद जय पराजय कुछ नहीं बस, आँकड़ो का मेल है । आड़ ..लेकर ..दूसरों.. की़, जीतने…"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"जनाब मिथिलेश वामनकर जी आदाब, उम्द: रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर posted a blog post

ग़ज़ल: उम्र भर हम सीखते चौकोर करना

याद कर इतना न दिल कमजोर करनाआऊंगा तब खूब जी भर बोर करना।मुख्तसर सी बात है लेकिन जरूरीकह दूं मैं, बस…See More
Apr 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"मन की तख्ती पर सदा, खींचो सत्य सुरेख। जय की होगी शृंखला  एक पराजय देख। - आयेंगे कुछ मौन…"
Apr 13
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-162
"स्वागतम"
Apr 13

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service