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तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

जब भी सोया अकेली रातों में

डूबता रहा  तुम्हारी बातों में 

कभी थे हाथ, तेरे हाथों  में 

हाँ! तुम  ही तुम महकती थीं 

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

जब होती थीं तुम तन्हाई में 

विरह की सम्वेदित अंगड़ाई में 

भावों की असीम गहराई में 

साध चुप्पी, तुम बिलखती थीं

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

मुझे याद है वे सारे पल 

वह परसों, आज और कल

जब टूटा था तेरा सम्बल

तुम भरे गले से  हिलकती थीं

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

तेरे मतवाले नशीले नयन 

घायल करते थे मेरा मन 

बाँहों में तेरी, जो अपनापन

जुल्फें रोज ही उलझती थीं

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

जब प्रेम पर पहरेदारी हुई 

दिल में चुभी ज्यों गर्म सुई

धीमी जलती धडकन की रुई

तुम  भी तो उधर सुलगती थीं 

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

           

 -जितेन्द्र 'गीत' 

मौलिक व अप्रकाशित  

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 13, 2013 at 12:08am

आपने रचना को पसंद किया, आपका बहुत आभार आदरणीय दवेंद्र भाई

सादर!

Comment by Devendra Pandey on September 12, 2013 at 2:56pm

Dil Ko Choo Li aapki Yah Rachna 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 15, 2013 at 12:40am

जब भी सोया अकेली रातों में

डूबता रहा  तुम्हारी बातों में 

कभी थे हाथ, तेरे हाथों  में 

हाँ! तुम  ही तुम महकती थीं 

तुम्हारी चूड़ियां खनकती थीं 

खूबसूरत ..प्रेम की अद्भुत छटा लिए प्यारी रचना ...जितेन्द्र जी जय श्री राधे

हरदा से मेरे सहकर्मी भी रहे हैं देवेन्द्र देवड़ा ...पदम् देवड़ा आदि ...


भ्रमर ५


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 14, 2013 at 4:04pm

बहुत कोमल और सुन्दर भावाभिव्यक्ति 

हार्दिक शुभकामनाएँ आ० जीतेंद्र जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 14, 2013 at 9:38am

आदरणीय सौरभ जी

आपकी उत्साहबर्धक प्रतिक्रिया से मुझे मनोबल मिलता है, मार्गदर्शन व् आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 14, 2013 at 9:34am

आदरणीय विजय निकोर जी

आपने रचना को पसंद किया, रचना सार्थक हुयी, आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 14, 2013 at 9:31am

आदरणीय योगेश्वर जी

बहुत बहुत शुक्रिया आपका, स्नेह बनाये रखिये

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2013 at 12:26am

गंभीर प्रयास हुआ है.  बहुत खूब !

ढेर सारी बधाइयाँ ...

Comment by vijay nikore on August 12, 2013 at 7:34am

सुन्दर, अति सुन्दर।

बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by योगेश्वर 'राग' on August 11, 2013 at 10:36pm

आदरणीय जितेन्द्र 'गीत' जी! आपके अंदर के कवि ने तो कमाल कर दिया.......

                                              

       

                                                               हार्दिक बधाई!सादर योगेश्वर 'राग'

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