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दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

मेरे मन का तुम आकर्षण हो

इस ह्रदय का तुम स्पंदन हो

तुम कुमकुम हो तुम चन्दन हो

तुम ताजमहल से सुन्दर हो

 

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

 

तुम ही हो मेरा प्रेम राग

तुम ही हो मेरी प्रेम आग

मै भ्रमर बना तुम हो पराग

तुम मन मंदिर का हो चिराग

 

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

 

तुम ध्येय मेरे जीवन का हो

तुम ध्यान मेरे प्रतिपल का हो

तुम हिरणों की चंचलता हो

तुम्हे पाना एक सफलता हो

 

 

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

 

मै वैरागी , तुम माला हो

मै प्यासा , तुम मधुशाला हो

प्रेम क्षुधा छलकाने वाली

तुम यौवन की हाला हो

 

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

 

तेरे नैन नक्श सब तीखे है

तेरे आगे बाकि सब फीके है

तेरे आगे पीछे ड़ोल रहे

तुझे देख देख कर जीते है

 

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

 

तुम हो सरिता का कल कछार

तुम पहली बारिश की फुहार 

तेरी नयन रेख एक तीव्र बाण

हो जाती है मेरे आर पार

 

बस तुम ही मेरी प्रियतम हो

दुनिया में तुम सुन्दरतम हो

मौलिक व अप्रकाशित

शब्दकार : आदित्य कुमार 

 

 

Views: 527

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 11, 2013 at 2:18pm

कुछ और कहें. प्रतीक्षा रहेगी. 

शुभ-शुभ

Comment by Aditya Kumar on August 3, 2013 at 10:49am

Lata tej आपका हार्दिक आभार 

Comment by Aditya Kumar on August 3, 2013 at 10:48am

आभार D P Mathur JI 

Comment by D P Mathur on August 3, 2013 at 10:00am

 अच्छी रचना की आपको बधाई !

Comment by Lata tejeswar on August 3, 2013 at 8:41am

nice

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