For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पिता,परमात्मा सा होता है

पिता परमात्मा सा होता है

जो जन्म देकर दुनिया में ले आता है

वो दुनिया दिखाने वाला पिता,परमात्मा से कैसे कम है

हमारी आहट से जो सन्न हो जाता है

जिसके भीतर हर पल हमारे पालन की चिन्ता पलती है

जो हमें जन्म देने के बाद,

अपने सारे सुख भूल जाता है।।

दुनिया में हमारे आने के बाद

वो एक राह पर ही चलता है

और अपने पुरातन ताज्य कार्य भी छोड देता है

उसकी दुनिया हमारी आहट से बदल जाती है

वो पिता परमात्मा सा होता है।।

                                                 सूबे सिंह सुजान

मौलिक  व  अप्रकाशित 

Views: 633

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सूबे सिंह सुजान on June 16, 2013 at 4:30pm

 vijayashree........... आपका आभार,,,,,,आपने अपने विचारों से अवगत कराया.........धन्यवाद...........

Comment by सूबे सिंह सुजान on June 16, 2013 at 4:28pm

 coontee mukerji....जी , आपका आभार,,,,,,आपने अपने विचारों से अवगत कराया.........धन्यवाद

Comment by सूबे सिंह सुजान on June 16, 2013 at 4:28pm

बृजेश नीरज......ji,,आपकी बात से सहमत हूँ गद्यात्मक से बचना चाहिये..........और मैं बचता भी हूं ......यह कभी-कभार होजाता है

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 14, 2013 at 11:52pm
आदरणीय..सुजान जी, माता पिता ईश्वर से भी बड़े होते हैं, उनकी महिमा सर्वोपरि है ।सुंदर प्रस्तुतिकरण ...शुभकामनाऐं
Comment by vijayashree on June 14, 2013 at 8:57pm

माता -पिता के बारे में जितना भी लिखा जाए ..कम ही लगता है ...

सुंदर रचना /बधाई

Comment by coontee mukerji on June 14, 2013 at 1:17am

बहुत सुंदर सुजान जी /सादर / कुंती

Comment by बृजेश नीरज on June 12, 2013 at 10:18pm

आदरणीय सुजान जी,
माता पिता की महिमा जितनी गायी जाए उतनी कम है। आपको इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।
आपसे एक निवेदन है कि अतुकांत लिखते समय कृपया गद्यात्मकता से बचने का प्रयास करना चाहिए।
सादर!

Comment by सूबे सिंह सुजान on June 11, 2013 at 10:42pm

Rajesh Kumar Jha....जी............आपकी प्रस्तुति सही है

अहत पुरुष जारे पितु-माता,तिसपर कन्‍यादान विधाता

चास करे औ फसल चराए, ठूंठ चूस मन को समझाए

Comment by सूबे सिंह सुजान on June 11, 2013 at 10:41pm

Shyam Narain Verma..........जी स्वागत

Comment by राजेश 'मृदु' on June 11, 2013 at 6:18pm

बिल्‍कुल सच लिखा है आपने । एक पिता अपने दायित्‍व को वहन करते हुए अर्धनारीश्‍वर ही होता है । कुछ पंक्तियां पिता के लिए मेरी तरफ से यूं हैं

' अहत पुरुष जारे पितु-माता,तिसपर कन्‍यादान विधाता

चास करे औ फसल चराए, ठूंठ चूस मन को समझाए

सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service