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क्रांति 

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चिंता छोड़ो सुख से जियो 

पुस्तक हम भी ले आये 

विश्वास रहा न उनके ऊपर

वोट थे जिनको दे आये

पढ़ा लगा मन उसे प्रतिदिन

चिंता दूर न हो पायी 

गयी बेटी सवेरे पढने 

जब तक वापस घर न आयी

कहाँ देखें कहाँ न देखें 

हर पल लगा रहे  अंदेशा 

न जाने  कहाँ  मिल जाएँ 

राक्षस  बदले हुये वेषा

लाख उपाय कर के  देखे

नित बदल बदल कर कानून

धरना प्रदर्शन आन्दोलन 

रोक सका  न बहता खून          

सोच आपकी गलत नही
सोच कर सोच को देखो

जरूरी हुई  नैतिक शिक्षा

मन आवेगों को रोको

सूरज तपना छोड़े न
मयूर न छोड़ता  नर्तन
सैनिक बजाता  बांसुरी
कवि करता अब कीर्तन
बदलेगा समाज कैसे
कैसे शांति अब  आएगी
रामायण गीता भूले सब
सोचो कैसे क्रांति आयेगी

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 

२२-४-२०१३ 

मौलिक/अप्रकाशित 

Views: 727

Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 3:25pm

स्नेही पाठक जी 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 3:24pm

आदरणीया वेदिका जी 

सादर 

लिखिए , जरूर लिखिए . मार्गदर्शन मिलेगा 

धन्यवाद 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 3:23pm

आदरणीय अशोक जी 

सादर आभार 

सस्नेह 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 3:22pm

आदरणीय विजय सर जी 

सादर अभिवादन 

आपके असीम स्नेह हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 3:21pm

आदरणीय वर्मा सर जी 

स्नेह हेतु आभार 

सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 3:20pm

आदरणीया सावित्री जी 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 2:52pm

आदरणीया प्राची जी 

सादर अभिवादन 

आपका प्रोत्साहन मुझे आगे बढ़ने में सहायक होगा. 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 2:50pm

आदरणीय केडिया जी ; स्नेह हेतु सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 2:49pm

आदरणीया कुंती जी 

सादर अभिवादन 

बदलना पड़ेगा. 

आभार स्नेह हेतु 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 26, 2013 at 2:48pm

आदरणीया वन्दना जी 

सादर 

पिता की  वेदना है 

आभार 

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