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एक प्रयास,,आप सबकॆ चरणॊं मॆं सादर समर्पित है,,,
======================================
(१) मदिरा सवैया =
==============
मारति गॆंद गिरी यमुना जल, बीचहिँ धार बहात चली !!
भाषत राज गुनीजन जानहु, मानहुँ कुम्भ नहात चली !!
त्रॆतहिँ कॆवट की तरिनी जसि, राम चढ़ॆ  उतिरात चली !!
आनहुँ गॆंद अबै मन-मॊहन, ग्वालन ग्वालन बात चली !!

(२) मदिरा सवैया =
==============
भूल हमारि भई मनमॊहन, खॆल खॆलाइ लियॊ तुम का !!
दाँव हमारि रहै  तबहूँ हम, दाँव  दिलाय दियॊ तुम का !!
खॆल नसाइ दिहौ सब मॊहन,बॊलहु हॊंठ सियॊ तुम का !!
गॆंद हमारि हमैं अब चाहइ,मीत अनीति कियॊ तुम का !!

(३) मत्तगयंद सवैया =
=================
दॆब उलाहन जाइ घरै हम, मारइ तॊहि यशॊमति मैया !!
नंदहुँ मारहिँ दॆंहि धपा-धप, पींठ उँघारि करैं गति भैया !!
बाँधि धरैं रसरी दुहुँ हाँथन, पाँव कसैं जसि नाठर गैया !!

या लकुटी जब पींठ परै सुन,बॊल उठैं जियरा तब दैया !!

कवि : "राज बुन्दॆली"
१८/०४/२०१३

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Comment

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Comment by कवि - राज बुन्दॆली on April 24, 2013 at 1:43pm

Ashok Kumar Raktale आदरणीय आपका यह स्नेह अमूल्य है मेरे लिये,,,,आपको सादर नमन करता हूं,,,,,,,

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 23, 2013 at 8:39am

अहा......हा वाह.....क्या खूब सवैये रचे हैं आदरणीय राज बुन्देली साहब लगता है बार बार गाते ही रहो. अति सुन्दर और मन मोहन पर मनमोहक सवैये. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on April 19, 2013 at 12:01am

आदरणीय,,,, Saurabh Pandey जी ,,,गुरुदेव इस में मेरी कोई कारीगरी नहीं है,,,

यह आपके स्नेह और आशीष का परिणाम जो हो जाता है,आपके चरणॊं मॆं रख देता हूँ,,,,,,,

इस स्नेह हेतु आपको नमन,,,,आशा है आपका स्नेह यूँ ही मुझे मिलता रहेगा,,,,

 

आपका सदैव स्नेहाकांक्षी

कवि - राज बुन्देली,,,,,,,,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 18, 2013 at 11:25pm

भाई राज साहब, तीनों सवैये कृष्ण की बाल-लीला का समर्थ आईना हैं.

त्रेतहिं केवट की तरिनी जसि.. ने तो चमत्कार ही प्रस्तुत कर दिया है. और जिस सुन्दरता से गेंद ने उलाहना दिया है वह अद्भुत है. बहुत-बहुत बधाई.. .

सादर

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on April 18, 2013 at 11:01pm

Kewal Prasad जी भाई साहब ,,,,रचना कॊ समय देने हेतु,,,,,धन्यवाद,,,,,

बहुत बहुत आभार आपका,,,,,यह स्नेह बनाये रखियेगा,,,,,,,,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 18, 2013 at 10:44pm

आदरणीय  राज भाई जी,  तीनों ही सवैया मनभावनी अतिसुन्दर।  हार्दिक बधाई स्वीकारे।  सादर,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on April 18, 2013 at 10:42pm

mrs.kavita verma जी ,,,,,बहुत बहुत धन्यवाद आपका इस हौसला-आफ़जाई के लियॆ,,,,,,नमन,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on April 18, 2013 at 10:40pm

SANDEEP KUMAR PATEL  जी ,,,सच कहूँ तो आप सब लोगों का छन्द लेखन पढ़कर ही मैं छन्द लेखन की ओर अग्रसर हुआ हूँ,,, आप सभी का एवं मंच का बहुत बहुत आभार,,,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on April 18, 2013 at 10:37pm

rajesh kumari जी,,,,,, आपकी इस बेहद सुन्दर प्रतिक्रिया से मन अभिभूत हो गया,,आपके इस साहित्यानुराग को नमन करता हूँ,,,, बहुत बहुत आभार आपका,,,,,,,,,,

Comment by Kavita Verma on April 18, 2013 at 10:03pm

आदरणीय कवि  राज बुन्देली जी आपके छंद की शोभा अतुलनीय है ..बधाई स्वीकारें ...

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