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आखरी वादा ..........

मैं तुझे भूल जाऊं,ना कभी याद आऊँ
यह आखरी वादा तुमने मुझसे ही लिया
जिस पल भी तेरी याद आयी
उस पल को ही मिटा दिया

काश, हवाओं को भी कुछ कह जाती 

मौसमो को भी यह कसम दे जाती

हवाएँ पूछती रही उस गुलबदन का पता
जिसे छू कर वो महकती थीं
बारिश की बूंदे ज़ुल्फो को तरसती रही
जिन पर गिर, धीरे धीरे फिसलती थीं
वो तारा अब दिन मे भी निकलता है
जिसे तुम मेरी चमकती तकदीर कहती थी
वह पेड़ आज भी उतना ही घना है
छाँव मे जिसकी,तुम इंतज़ार करती थी
अपने पत्तों को भी उसने गिरने ना दिया

इन सब ने तेरी याद मे
चैन से मुझे जीने ना दिया
पर मेरी पाक मोहब्बत ने
यह आखरी वादा भी पूरा किया...........

[मौलिक व अप्रकाशित]

 

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Comment

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Comment by pawan amba on March 8, 2013 at 8:28am

 KISHAN KUMAR Ji........ Meena Pathak Ji  .........DILEEP KUMAR JAISWAL  sahab....aap sb ka dhanywaad....

Comment by DILEEP KUMAR JAISWAL on March 1, 2013 at 8:37pm

पर मेरी पाक मोहब्बत ने 
यह आखरी वादा भी पूरा किया...........

 ye line mujhako bhi bahot pasand aayi......

Comment by Meena Pathak on March 1, 2013 at 2:03pm

बहुत बहुत सुन्दर रचना .. बधाई 

Comment by pawan amba on February 28, 2013 at 4:15am

बहुत बहुत आभार आपका राम शिरोमणि पाठक जी,,,ram shiromani pathak ji

Comment by ram shiromani pathak on February 27, 2013 at 9:19pm

इन सब ने तेरी याद मे
चैन से मुझे जीने ना दिया
पर मेरी पाक मोहब्बत ने
यह आखरी वादा भी पूरा किया...........

ये पंक्तिया मुझे बहोत अच्छी लगी आदरणीय पवन जी  ......हार्दिक  बधाई

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