For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी

जब से मजबूरी मेरी बढ़ने लगी

दोस्तों से दूरी भी बनने लगी

 

उनकी हाँ में हाँ मिलाया जब नहीं 

बस मेरी मौजूदगी डसने लगी

 

कद मेरा उस वक्त से बढ़ने लगा

आजमाइस दुनिया जब करने लगी

 

भा गई फिर सब्र की तौफीक भी 

ज़ुल्म की शिद्दत भी जब बढ़ने लगी

 

दूर मुझसे आप जब से हो गए

ज़िंदगी से हर खुशी झड़ने लगी

 

तेरी हर तकलीफ से वाकिफ़ हूँ मै

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी 

Views: 697

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr.Ajay Khare on February 19, 2013 at 12:05pm

khan sahib bahut hi badia khyaal hai badhai

Comment by विजय मिश्र on February 19, 2013 at 11:49am

नादिर साहब ! गुमसुम सी चल रही आज के दौर के इंसान की गुमसती हुई जिंदगी को बखूबी उभारा है आपने अपने लफ्जों में . बेहतरीन, शायद आज की ग़ज़ल का मौजूँ ऐसा ही होना चाहिए .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 19, 2013 at 11:20am

बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है आ. नादिर जी

शुभकामनाएं  

Comment by vijay nikore on February 19, 2013 at 9:07am

बहुत लाजवाब शेर हैं।

बधाई।

विजय निकोर

Comment by नादिर ख़ान on February 19, 2013 at 8:16am

अदरणीय सौरभ जी, अदरणीय  वीनस जी आप दोनों का बहुत आभार हमेशा आप लोगों से सीखने को मिलता है, ये सौभाग्य की बात है। बहुत जल्दी गज़ल में सुधार की कोशिश करेंगे ।मार्गदर्शन के लिए बहुत आभारी हूँ ।

Comment by नादिर ख़ान on February 19, 2013 at 8:11am

 बृजेश जी ,आशीष जी ,वेदिका जी आप लोगों ने रचना को सराहा बहुत-बहुत शुक्रिया,लिखने के लिए फिर हौंसला मिला ।

Comment by वीनस केसरी on February 19, 2013 at 1:46am

मतला से आख़िरी शेअर तक बेहतरीन ग़ज़ल हुई है ...

कई शेअर शानदार हैं

तेरी हर तकलीफ से वाकिफ़ हूँ मै

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी

आख़िरी शेअर के लिए दिली मुबारकबाद 

छोड़ा २२  को छुटा १२ करने का विकल्प मौजूद है बस भाव में हल्की सी तबदीली आयेगी ...
चौथे शेअर में मिसरा उला में भी रदीफ़ निभ गई है उस पर भी नज़ारे सानी फरमाएँ तो ग़ज़ल और निखरेगी ...
शुभकामनाएं

Comment by वेदिका on February 19, 2013 at 12:40am

वाह वाह !

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 18, 2013 at 11:56pm

वाह वाह !!!  यह शेर तो लाजवाब है.......

तेरी हर तकलीफ से वाकिफ़ हूँ मै

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 18, 2013 at 11:55pm

नादिर साहिब , आपकी कोशिश अच्छी लगी. 

उनकी हाँ में हाँ मिलाना क्या छोड़ा

बस मेरी मौजूदगी डसने लगी

इस शेर के लिए बार-बार बधाई कह रहा हूँ. बहुत सुधरी बात कही है आपने.

वैसे भाई छोड़ा  के छो को गिराना उचित नहीं लगा है.

आपके कहे का हमेशा इंतज़ार रहता है.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service