For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जब कामदेव संतप्‍त हुए (चौपाई)

जब शिवजी का ध्‍यान भंग करने के लिए मदनदेव को कहा गया तो वे राजी तो हो गए किंतु उनका मन गहरी सोच में पड़ गया उनकी कशमकश को दर्शाने के लिए चौपाईयां लिखी जिसमें आवश्‍यक सुधार आदरणीय अम्‍बरीष जी ने सुझाया जिसके बाद इसे ओबीओ के पटल पर रखने का साहस कर पा रहा हूं ।

मदन सदन विकराल उदासी| राग-रंग अब हैं वनवासी||
छंद तिरोहित ताल मलीना| बिलख-बिलख बाजी मन वीणा||

अज विनोद नहीं तनिक सुहाए| नित्‍य पथिक पथ आज भुलाए||
व्‍य्रग्र विकल बैठे ऋतुराजा| हिय अंतर अज शिशिर विराजा||

साज-बाज बहु बार पुकारे| सकल वृंद बैठे मनमारे||
एक कूक नहिं कोयल बोली| अनल-अश्रु में रति भी रो ली||

कुंडल हार मुकुट आभूषण| अज पन्‍नग सम करते सन-सन|
सरस सांझ अज नहीं सुहाए| निशा निकर अज खूब चिढ़ाए||

शिथिल गात कुंतल बिखराए| सकल निशा महि बैठ बिताए||
कूके खग फैला उजियारा| अज प्रभात गहरा अँधियारा||

Views: 502

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 12, 2013 at 12:03am

भाषा आपने अपने तईं अवधी के बहुत करीब रखने की कोशिश की है. यह आपके प्रयास-निर्भरता को ही बताता है. एक बार छोड़ बार-बार आज के लिए अज का प्रयोग विशेष लगा है.  छंद का प्रवाह संयत है, भाई राजेशजी.

संभव हो तो अधोलिखित पद को पुनः देख लें -

अज विनोद नहीं तनिक सुहाए| नित्‍य पथिक पथ आज भुलाए||

सधन्यवाद

Comment by shubhra sharma on February 10, 2013 at 9:54am

रस टपकत मन तृप्त बहुते ,एक एक शब्द सांचे में जूते 

 

Comment by Dr.Ajay Khare on February 9, 2013 at 4:34pm

kaamdeo ji santrapt huye ham bhi padkar trapt huye badhai

Comment by ram shiromani pathak on February 8, 2013 at 6:41pm

बहोत सुन्दर चौपाई  मित्र....इतना गहर ज्ञान नई की आपको मै बता सकूँ लेकिन जितना समझ आया उतना ही उत्तम अति उत्तम ...हार्दिक बधाई ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 8, 2013 at 3:51pm

जबरदस्त प्रवाह एवं शब्द शानदार चौपाई लिखी है राजेश झा जी हर्दिक बधाई 

साज-बाज बहु बार पुकारे| सकल वृंद बैठे मनमारे||
एक कूक नहिं कोयल बोली| अनल-अश्रु में रति भी रो ली||---vaah vaah

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"                        सभी सदस्यों को…"
3 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"                 दिल लगाना नहीं कि तुम से कहें,  …"
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इश्क़ तो है मगर ये इतनी भी शा'इराना नहीं कि तुझ से कहें साफ़ गोई सुनोगे क्या तुम ये अहमकाना…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service