For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

किसने रंग डाला है बोलो (राजेश कुमार झा)

किसने रंग डाला है ऐसा
मारी किसने पिचकारी
ऐसे ही रंग मोहे रंग दे
हे मुरलीधर बनवारी

बह गए मेरे रेत घरौंदे
टूट गए आशा के हौदे
चाहे जितनी जुगत लगा लूं
कमती ना है दुश्‍वारी

कैसे बिखरे तान सहेजूं
किस जल से ये प्राण पखेजूं
सांझ के अनुपद धूनी रमाए
कह जाओ मुरलीधारी

शेष पहर छाया है पीली
भीत भरी अंखियां हैं नीली
धिमिद धिमिद नव नाद जगाते
आओ हे तारणहारी

मनमोहन मादक मतवारो
मधुर मदिर धर रूप पधारो
तेरी आस में पलक बिछाए
बैठी है दुनिया सारी

(मौलिक रचना)

Views: 430

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 18, 2013 at 3:35pm

बहुत सुन्दर भक्ति भाव से पगी इस रचना के लिए हृदय से बधाई आ. राजेश जी 

Comment by Shanno Aggarwal on January 17, 2013 at 8:18pm

राजेश जी, बहुत सुंदर रचना. 

Comment by राजेश 'मृदु' on January 17, 2013 at 6:17pm

आप सबका सादर आभार । मैं पहले की अपेक्षा मात्रा को लेकर काफी सावधानी बरत रहा हूं लेकिन मात्राएं अपना खेल दिखा ही जाती है, शायद इसको संभालने हेतु कुछ वक्‍त और देना होगा

Comment by upasna siag on January 17, 2013 at 4:55pm

मनमोहन को समर्पित पंक्तियाँ बहुत अच्छी है ....सादर 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 17, 2013 at 4:00pm

बहुत सुन्दर भक्तिमय अभिव्यक्ति
बहुत बहुत बधाई आपको
जैसा गुरुदेव ने कहा सहमत हूँ 
कहीं कहीं गेयता भंग हो रही है ................

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 17, 2013 at 3:41pm

समर्पण भाव से लिखा भक्ति गीत, बधाई राजेश कुमर झां 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 17, 2013 at 11:03am

सुन्दर गीत हार्दिक बधाई मित्रवर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 17, 2013 at 5:58am

समर्पण से ओतप्रोत इस भक्ति गीत के लिए धन्यवाद और हार्दिक बधाइयाँ.. . 

एक बात : गेय पंक्तियों में मात्राओं को नियत रखा जाय तो पद्य-कसौटी पर भी रचना उत्तम मानी जाती है.

सधन्यवाद

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"धन्यवाद आदरणीय "
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रणाम भाई अखिलेश जी, क्या ही सुंदर चौपाईयां हुईं हैं। वाह, वाह। फागुन का पूरा वृतांत कह दिया…"
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"बौर से फल तक *************** फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही…"
7 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
" दिल रुलाना नहीं कि तुझ से कहें  हम ज़माना नहीं कि  तुझ से…"
7 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" दिल रुलाना नहीं कि तुझसे कहें  हम ज़माना नहीं कि तुझसे कहें   फ़क़त अहसास है…"
8 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"भाई अजय गुप्ता जी, मेरी नजर में बहुत शनदार रचना हुई है। इसके लिए बहुत बहुत बधाई। अनुष्टुप छंद तो…"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"यह रचना #अनुष्टुप_छंद में रचने का प्रयास किया है। हिन्दी में इस छंद का प्रयोग कम है लेकिन मेरा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"झूठों ने झूठ को ऊँचे, रथ पर बिठा दिया और फिर उसे खूब, सुंदर सा सजा दिया   पहिये भी गवाहों के,…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"कृपया गिरह में // वो ज़माना // को //अब ज़माना// पढ़ा जाए। धन्यवाद "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"शुक्रिया मनजीत जी, बहुत आभार। ।  //तरही मिसरे पर आपका शेअर कमाल है।// हा हा हा, तिलकराज…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
" आदरणीय अजय गुप्ता जी ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। तरही मिसरे पर आपका शेअर कमाल है।"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय ऋचा जी ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए, विद्वानों की राय का इंतज़ार करते हैं।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service