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किसने रंग डाला है बोलो (राजेश कुमार झा)

किसने रंग डाला है ऐसा
मारी किसने पिचकारी
ऐसे ही रंग मोहे रंग दे
हे मुरलीधर बनवारी

बह गए मेरे रेत घरौंदे
टूट गए आशा के हौदे
चाहे जितनी जुगत लगा लूं
कमती ना है दुश्‍वारी

कैसे बिखरे तान सहेजूं
किस जल से ये प्राण पखेजूं
सांझ के अनुपद धूनी रमाए
कह जाओ मुरलीधारी

शेष पहर छाया है पीली
भीत भरी अंखियां हैं नीली
धिमिद धिमिद नव नाद जगाते
आओ हे तारणहारी

मनमोहन मादक मतवारो
मधुर मदिर धर रूप पधारो
तेरी आस में पलक बिछाए
बैठी है दुनिया सारी

(मौलिक रचना)

Views: 444

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 18, 2013 at 3:35pm

बहुत सुन्दर भक्ति भाव से पगी इस रचना के लिए हृदय से बधाई आ. राजेश जी 

Comment by Shanno Aggarwal on January 17, 2013 at 8:18pm

राजेश जी, बहुत सुंदर रचना. 

Comment by राजेश 'मृदु' on January 17, 2013 at 6:17pm

आप सबका सादर आभार । मैं पहले की अपेक्षा मात्रा को लेकर काफी सावधानी बरत रहा हूं लेकिन मात्राएं अपना खेल दिखा ही जाती है, शायद इसको संभालने हेतु कुछ वक्‍त और देना होगा

Comment by upasna siag on January 17, 2013 at 4:55pm

मनमोहन को समर्पित पंक्तियाँ बहुत अच्छी है ....सादर 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 17, 2013 at 4:00pm

बहुत सुन्दर भक्तिमय अभिव्यक्ति
बहुत बहुत बधाई आपको
जैसा गुरुदेव ने कहा सहमत हूँ 
कहीं कहीं गेयता भंग हो रही है ................

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 17, 2013 at 3:41pm

समर्पण भाव से लिखा भक्ति गीत, बधाई राजेश कुमर झां 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 17, 2013 at 11:03am

सुन्दर गीत हार्दिक बधाई मित्रवर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 17, 2013 at 5:58am

समर्पण से ओतप्रोत इस भक्ति गीत के लिए धन्यवाद और हार्दिक बधाइयाँ.. . 

एक बात : गेय पंक्तियों में मात्राओं को नियत रखा जाय तो पद्य-कसौटी पर भी रचना उत्तम मानी जाती है.

सधन्यवाद

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