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सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे

छोडो मेहँदी खडक संभालो
खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि,
मस्तक सब बिक जायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे

कब तक आस लगाओगी तुम,
बिक़े हुए अखबारों से,
कैसी रक्षा मांग रही हो
दुशासन दरबारों से|

स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं
वे क्या लाज बचायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आयंगे

कल तक केवल अँधा राजा,
अब गूंगा बहरा भी है
होठ सी दिए हैं जनता के,
कानों पर पहरा भी है

तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
किसको क्या समझायेंगे?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे

-पुष्यमित्र उपाध्याय

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Comment by Pushyamitra Upadhyay on December 31, 2012 at 11:10am

seema didi, jawahar sir, laxman sir....saadar aap sabhi ka,....aashish bnaaye rakhiye :)

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 31, 2012 at 7:09am

समयानुकूल अभिब्यक्ति!

Comment by seema agrawal on December 30, 2012 at 3:31pm

स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं
वे क्या लाज बचायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आयंगे.......बहुत सटीक और सच्ची बात लिखी पुष्य मित्र आपने 

वस्तुस्थिति  को रेखांकित करती इन पंक्तियों के लिए विशेष बधाई 

कल तक केवल अँधा राजा,
अब गूंगा बहरा भी है
होठ सी दिए हैं जनता के,
कानों पर पहरा भी है

तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
किसको क्या समझायेंगे

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 30, 2012 at 3:28pm
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे
जोश भरी सुन्दर रचना हार्दिक बधाई स्वीकारे भाई पुष्यमित्र उपाध्याय जी 
Comment by Pushyamitra Upadhyay on December 29, 2012 at 5:49pm

prachi didi, ajay sir, vijay sir....aapko saadar abhar preshit karta hoon...anuj ka pranaam sweekar kijiye

Comment by vijay nikore on December 29, 2012 at 12:32pm

इस सुन्दर रचना के लिए साधुवाद।

विजय निकोर

Comment by ajay sharma on December 28, 2012 at 10:56pm

शर्म ओ हया के सर पे दुपट्टे भी क्या करें 

बहनों के बढ गए है बहुत काम दोस्तों 
सीखों अदब औ करना एहतराम दोस्तों ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
Comment by ajay sharma on December 28, 2012 at 10:53pm

छोडो मेहँदी खडक संभालो
खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि,
मस्तक सब बिक जायेंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे   i must say best of posts i have recently read ,,,,,bhai ji hardik badhayiiiiiiiiiiiiiiiiiiii


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 28, 2012 at 8:57pm

वाह! बहुत सुन्दर भाव, कथ्य, प्रवाह.

क्रांति का बिगुल बजाती एक सुन्दर समसामयिक रचना.

हर पंक्ति पर हार्दिक बधाई स्वीकारे भाई पुष्यमित्र उपाध्याय जी 

Comment by Pushyamitra Upadhyay on December 28, 2012 at 8:50pm

ashok sir, verma sir, saadar abhar preshit krta hu..sweekar kijiye

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