For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


सब भर जाएगा !


रॉबिन तुम एकदम रॉबिन चिड़िया जैसे हो

छल्लेदार बाल , अकसर लाल रहने वाली दो गोल बड़ी आँखें

कभी उंघते नहीं देखा तुम्हे

माँ को कभी उठाना नहीं पड़ता

मुर्गे की एक सरल बांग पर उमड़ जाती है सुबह

और तुम नंगे पैर ही दौड़ जाते हो सागर के अंचल पर

अंतहीन बढ़ते कदम

रेत पर छापती चलती हैं नन्ही इच्छाओं के पैर

तुम चलते कहाँ हो

उछलते हो

रॉबिन तुम्हे अच्छा लगता है

अकसर एक पत्थर उछालकर फेंकना

दूर जितना दूर फेंक सको

चट्टान पर गोह की तरह चिपककर देखते हो अपना खेल

तुम्हारी क्षमता का पत्थर

लहरों को तोड़ देता है

विवर बनते हैं

इस गोलाई में घूमते देखते हो पत्थर

और फिर सब भीतर समाहित होना ..

तुम्हे अच्छा लगता है इस विवर को भरना

छोटी सीपियाँ , घोंघे , सूखे पत्ते , सफ़ेद रेत और न जाने क्या

समुद्र को भर दोगे क्या ?

रॉबिन तुम्हे जाल फेंकना कभी अच्छा नहीं लगा

खाली हो जाता है समुद्र

इस जाल में फंसकर ...

तुम अल्बर्ट के साथ गोल नाव पर बैठकर दूर तक जाना पसंद करते हो
तुम्हारे इस पिता ने बंजारापन दिया है

जबकि मैं टिकना मांगती रही

जैसे मेरा चरित्र टिक गया है

समुद्र के किनारे ..

इधर ये अबाबीलें

तुम्हारी नाव के साथ क्षितिज तक जाती हैं

तुम उनकी परछाई हाथ से पकड़ते हो

चप्पू को धप्प -धप्प मारकर

ऊँची उठती लहरों को कितना छोटा करोगे रॉबिन?

ओह! प्रहर कितना बीता ?

रॉबिन तुम्हारी गोल नाव किस किनारे लगी है?

उस बार तुम बहुत दूर गए थे न ..

समुद्र भरने ?

मैं जानती हूँ तुम लौटोगे

अल्बर्ट के साथ

मैं लाल रूमाल लिए हर तूफ़ान आने पर

अगाह करती हूँ

अरे ! गोल नाव वालों लौट आओ ...

तब तुम्हारे हाथ

किसी विवर से पुकारते हैं

माँ ...

भरने लगा है समुद्र !

देख दूर ..

कितना नीला आकाश

एकसाथ सागर टूट पड़ा है लहरों पर

मेरे पत्थर की तरह ..

इस बार उछाल में सब भर जाएगा !



अपर्णा

Views: 547

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 20, 2011 at 12:37am
very nice poem,excellent expression.......congrats
Comment by Aparna Bhatnagar on October 7, 2010 at 4:15pm
गणेश जी सदैव की तरह आप हमारी कविता पढने का धैर्य रखते हैं ... हमें भी निरंतर प्रेरणा मिलती है और सृजन की ये यात्रा आसान हो जाती है ... धन्यवाद !
Comment by Aparna Bhatnagar on October 7, 2010 at 4:13pm
गैर हिंदी नाम अटपटे नहीं लग रहे होंगे .. उम्मीद है . हिंदुस्तान में गोवा , केरल से लगे तटों पर पुर्तगाली या फिर ईसाई रहते हैं जो मछुआरे हैं ... हिंदुस्तान केवल हिन्दवी नामों का पर्याय नहीं . बस इस विविधता को ध्यान में रखकर ये नाम चुने और फिर आज सुबह अपने छोटे बगीचे में रॉबिन चिड़िया से मिलती जुलती सोन चिरैया देखी; बस इसलिए भी मन बन गया ....
कविता आपको अच्छी लगी , सर आभार !

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 7, 2010 at 10:34am
हर बार की तरह इस बार भी एक ससक्त रचना, बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति, धन्यवाद अपर्णा जी इस बेहतरीन कविता पर |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
12 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Mar 11
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service