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दो साल पहले मैं बेरोज़गार था, बेरोज़गार था

फ़िल्म : सी आई डी
तर्ज़    : सौ साल पहले......

दो साल पहले मैं बेरोज़गार था, बेरोज़गार था,
आज भी हूँ और कल भी रहूँगा

दोस्तों-पड़ोसियों  का कल भी कर्ज़दार था, कल भी कर्ज़दार था,
आज भी हूँ और कल भी रहूँगा

हर साल कई जोड़ी चप्पल घिस जाती है
पर किरण रौशनी की कोई नज़र न आती है
बूढ़े बाप-माँ के लिए कल भी अन्धकार था, कल भी अन्धकार था,
आज भी हूँ और कल भी रहूँगा
भूख का शिकार था और ग़म का गीतकार था, ग़म का गीतकार था,
आज भी हूँ और कल भी रहूँगा

फारम भरते भरते, ये हाथ थक चुके हैं
इस उम्र में ही सर के सब बाल  पक चुके हैं
नौकरी तो मिल जाती पर घूस से लाचार था, घूस से लाचार था,
आज भी हूँ  और कल भी रहूँगा
सिर्फ़ एक नौकरी का कल भी तलबगार था, कल भी तलबगार था,
आज भी हूँ और कल भी रहूँगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 

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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 3, 2012 at 5:28am

धन्यवाद  उमाशंकर मिश्रा जी......बहुत धन्यवाद

Comment by Albela Khatri on June 3, 2012 at 5:21am

जी.....शुक्रिया  रोहित जी...

Comment by Rohit Dubey "योद्धा " on June 3, 2012 at 12:23am

Atyant hasyasprad rachna.badhai Albela Jee

Comment by UMASHANKER MISHRA on June 2, 2012 at 7:10pm

बहुत बढिया रचना ...गीत के तर्ज में गाने में बहुत मजा आया

बच्चे हँस हँस लोट पोट हो रहे थे उनको स्कूल में सुनाने के लिए

मजेदार पेरोडी गाना मिल गया  आपको ढेरों बधाई

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 2, 2012 at 6:51pm

बहुत बेहतरीन पैरोडी बनी है सर जी मजा आ गया पढ़ कर
बहुत बहुत बधाई आपको साहब

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 2, 2012 at 5:35pm

आदरणीय अलबेला जी

 आपको परोडी हेतु बड़ी बड़ी बधाई 

रोते हुए लोगों को हँसने की राह दिखाई 

बेरोजगार रह कर कितनी तकलीफ उठाई 

कर लेते गर शादी रोजगार मिल न जाता 

खाली मूली जीवन की अनमोल घड़ियाँ 

कहीं न कहीं तार  जुड न  जाता 

बाबा को मिलता पोता सास को अदद बहु 

आमिर का सत्य मेव जयते एकता का सिरिअल 

माथे पर गहरा पसीना एक साथ आता 

आगे फिर कभी. जाइयेगा नहीं 

ब्रेक के बाद 

Comment by Albela Khatri on June 2, 2012 at 12:01pm

पैरोडी को साहित्यकारों  द्वारा बड़ी हेय दृष्टि से देखा जाता है  परन्तु मैंने महसूस किया कि ये भी तो एक विधा ही है  कविता की....अगर आपके पास  सोच उम्दा है और शब्द सामर्थ्य के साथ साथ  गायन का शौक है  तो  पैरोडी में भी  कविता वाली बात लाई जा सकती है .

भाई अरुण श्रीवास्तव जी,  मैं प्रयास  करूँगा कि इस मंच पर  इस विधा को स्थापित करने में अपना पूरा योगदान दूँ............सराहना के लिए शुक्रिया

सादर

Comment by Arun Sri on June 2, 2012 at 11:49am

बढ़िया पैरोडी सर जी ! आपके आने से ओ ब ओ मंच इस क्षेत्र में भी समृद्ध हुआ !

Comment by Albela Khatri on June 2, 2012 at 10:44am

khoob pakda  Rajesh Kumari ji...........bada hi tez chainal  hai  aaj tak...ha ha ha


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 2, 2012 at 10:30am

मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को हंसी में उडाता चला गया ह ना !!

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