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मेरी बात को सुन लड़की,
कुछ सपने मत बुन लड़की
सपनो को लगेगा घुन लड़की
मेरी बात को सुन लड़की...

मेरी बात मान लड़की
कुचल अपने अरमान लड़की
राक्षशों को पहचान लड़की
मेरी बात मान लड़की...

मत कर तू प्यार लड़की
ऐतराज़ करेगी 'तलवार' लड़की
बहुत तेज़ है धार लड़की
मत कर तू प्यार लड़की...

चीरती है सब जहां की ख़ामोशी
कौन समझ रहा माँ की ख़ामोशी
ठन्डे पड़े जिस्मोजां की ख़ामोशी
चीरती है सब जहां की ख़ामोशी

मेरी बात को सुन लड़की,
कुछ सपने मत बुन लड़की
.........X.........

© AjAy Kum@r

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Comment

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Comment by AjAy Kumar Bohat on May 15, 2012 at 2:25pm

Aadarniye Abhinav ji evam Shri Baagi ji ka shukriya, aapse Gyani jab hausla-afzahi karte hain to aur achchha likhne ki prerna milti hai....


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 15, 2012 at 9:10am

अजय जी बहुत ही गहरा छाप छोड़ती हुई रचना, कही ना कही आँख खोलने वाली कृति है बधाई आपको |

Comment by Abhinav Arun on May 14, 2012 at 11:09am

मेरी बात को सुन लड़की,
कुछ सपने मत बुन लड़की

बहुत  कुछ कहती ये पंक्तियाँ हार्दिक साधुवाद की पात्र हैं श्री अजय जी !!हार्दिक बधाई !!1

Comment by AjAy Kumar Bohat on May 14, 2012 at 10:40am

Shukriya Bhramar ji....

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 13, 2012 at 10:46pm

चीरती है सब जहां की ख़ामोशी
कौन समझ रहा माँ की ख़ामोशी
ठन्डे पड़े जिस्मोजां की ख़ामोशी
चीरती है सब जहां की ख़ामोशी

अच्छा है ..अब तो किताब के जरिये राज खुल जाए ..कुछ भी होता है आवेश में ...काल चक्र .....भ्रमर ५ 

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