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हमें आजादी चाहिये --

 

चाहिये ,चाहिये , चाहिये ,

हमें आजादी चाहिये ,

तुम्हारे गम से , तुम्हारी खुशी से ,

तुम्हारे ऐश से , तुम्हारे आराम से ,

तुम्हारे भोग से , तुम्हारे उपभोग से ,

तुम्हारे हुक्म से , तुम्हारे हुक्मउदूली से ,

तुम्हारे न्याय से , तुम्हारे अन्याय से ,

तुम्हारे शोषण से , तुम्हारी दया से ,

तुम्हारी नीति से , तुम्हारी अनीति से ,

तुमसे , तुम्हारी छाया से ,

तुमसे , तुम्हारी चाकरी से ,

तुमसे , तुम्हारे प्रेम से ,

तुमसे , तुम्हारी नफ़रत से ,

चाहिये , चाहिये , चाहिये ,

हमें आजादी चाहिये ,

तुम्हारी हर बात से आजादी चाहिये ,

तुम एक प्रतिशत भी नहीं ,

हम निन्यानवे प्रतिशत हैं ,

तुम वतनखोरों के चंगुल से ,

मुल्क को आजादी चाहिये ,

क्योंकि हम मुल्क हैं ,

है वतन मुल्क हमारा ,

मुल्क को भी बेच कर मुनाफ़ा कमाने वालो ,

दुनिया में नहीं कोई वतन तुम्हारा ,

तुमसे चाहिये ,

चाहिये , चाहिये , चाहिये ,

हमें आजादी चाहिये ,

हमें आजादी चाहिये ,

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Comment

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Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 17, 2012 at 7:18pm

अरुण जी आपने इस रचना के माध्यम से आम आदमी के  मनोभावों और व्यथा को बखूबी प्रस्तुत किया है| आपको हार्दिक बधाई !

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 18, 2012 at 11:01pm

ham panchi ek daal ke udte firte basayen apna jahan. badhai. aadarniy mahodaya ji, saadar abhivadan ke saath.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 17, 2012 at 11:49pm

भाई अरुणकांत जी, इस तेवर को सम्भाल कर रखियेगा. अस्सी के दशक की लीकतोड़ू कविताई याद आ गयी.

बधाई.

Comment by Sarita Sinha on April 17, 2012 at 9:02pm

आदरणीय अरुण कान्त जी....नमस्कार,

बहुत सरल तरीके से आप ने बहुत गंभीर बात कही है...अभी हम आजाद कहाँ है? वास्तव में हमें यही आज़ादी चाहिए...
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 17, 2012 at 6:38pm

श्रद्धेय सर,

इसी आज़ादी के लिए तो मुल्क आज तक तड़प रहा है| कविता की श़क्ल में आपने हर आम नागरिक के मनोभावों और व्यथा को बखूबी प्रस्तुत किया है| हार्दिक बधाई आपको,

Comment by अरुण कान्त शुक्ला on April 15, 2012 at 5:48pm

आदरणीय , प्रशंसा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . आशीर्वाद बना रहे .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 15, 2012 at 4:32pm

तेवर कड़े हैं, रचना एक अलग कलेवर के साथ प्रस्तुत है, इस अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकारें आदरणीय अरुण जी |

कृपया ध्यान दे...

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