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सबकुछ कह जाने दो ..

है बड़ी बात तो बड़ी बात ही रह जाने दो ..

मेरी बातों को मेरी बातों में बह जाने दो ..
लफ्ज़ कितना भी कहें कहते कहाँ हैं सबकुछ ..फिर भी ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

ज़लज़ला है ,तूफ़ान है या है बवंडर कोई ..
कितनी हलचल है मगर रूह है खोई खोई ..
फिर से कुदरत की कुदरत से ठन जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

लडखडाती है जुबां ,क्यूँ नहीं कहने पाती..
नमी आँखों की क्यूँ  स्याही में है घुल जाती ..
चलो यूंही सही ,स्याही अश्कों को बन जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

हैं सभी अपने पर कोई भी अपना तो नहीं ..
सच चेहरों पे मगर सच्चा सच में तो नहीं 
हर चेहरे से अब सच को छलक जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..



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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 22, 2012 at 4:58pm

हैं सभी अपने पर कोई भी अपना तो नहीं ..

सच चेहरों पे मगर सच्चा सच में तो नहीं 

हर चेहरे से अब सच को छलक जाने दो ..

आज लफ्ज़ - - लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

sari ki sari kavy rachna sundar bhavon se saji, kahane ko to bahut kuch magar, sab kuch kaha par uch na kaha fir ye bata dono hathon se kaese taali baji. badhai. 

 

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