For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

''चंदा तुम रूठ ना जाना''

कोई सूरज की तारीफ करे तो      

चंदा तुम ना होना गुमसुम l  

 

सूरज की साँसों की गर्मी 

करती है भू का उर्वर तन    

और तुमसे शीतलता पाकर      

कन-कन में होता परिवर्तन

है दोनों की ही हमें जरूरत  

धरती पर मुस्काना दोनों तुम l

 

मौसम के कई रूप बदलते 

कभी पतझर या फिर बसंत 

पर तुम दोनों अटल सदा से   

नभ पर है साम्राज्य अनंत

तुम पर है सारा जग निर्भर   

क्या होगा वरना क्या मालुम l

 

निशा जभी फैलाये आँचल   

है रजत चाँदनी देती ताल

भोर की आभा जब आती है   

किरणें भू पर फैलातीं जाल 

संझा होते ही क्षितिज पार

जैसे घुल जाता है कुमकुम l

 

कोई सूरज की तारीफ करे तो     

चंदा तुम ना होना गुमसुम l  

-शन्नो अग्रवाल   
 

Views: 503

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 9, 2012 at 8:33am

       वाह शन्नो जी प्रकृति का कितना सुन्दर रूप दिखाया आपने| सच में सूरज चाँद दोनों ही का स्थान  और निपुणता बराबर है इस लोक में|

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 9, 2012 at 12:48am

मौसम के कई रूप बदलते 

कभी पतझर या फिर बसंत 

पर तुम दोनों अटल सदा से   

नभ पर है साम्राज्य अनंत..

रूठ न जाना हे चंदा तुम 

सदा चमकते रहना 
पलक पांवड़े बैठे रहना 
सदा दमकते रहना 
सुन्दर ....जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 
भ्रमर का दर्द और दर्पण 

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on March 3, 2012 at 10:23am

बहुत सुन्दर रचना आदरणीया शन्नो जी, बधाई स्वीकार करें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 1, 2012 at 8:04am

sooraj aur chaand dono ka hi barabar mahatv hota hai jeevan me bhaavon ko darshati sundar rachna.

Comment by Shanno Aggarwal on March 1, 2012 at 1:10am

आभारी हूँ आपकी, सौरभ जी. रचना पढ़ने व पसंद करने का अत्यंत धन्यबाद.  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 1, 2012 at 12:27am

शन्नोजी,  इस रचना पर साधुवाद.  बधाई है.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service