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हर कोना शख्सियत को  

बर्बाद करने को आतुर है,
सोचा हर कोने से ही
प्रेम कर लिया जाए...
बर्बाद होना ही अगर 
आबाद होने की निशानी है,
तो क्यों ना आज 
बर्बाद ही हो लिया जाए...
 
-योग्यता

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Comment

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Comment by satish mapatpuri on January 16, 2012 at 1:50am

ज़हे नसीब ................ बधाई

Comment by Yogyata Mishra on January 15, 2012 at 6:10pm

thnx....:)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2012 at 10:20pm

रहस्य में सिमटी-सिमटायी कुछ पंक्तियाँ भली लगीं.  कोने   के अवगुंठन को सरसाना था न ! 

इस प्रयास पर शुभकामनाएँ.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 14, 2012 at 2:42pm

सुन्दर रचना योग्यता जी, भावनाओं का बढियां सम्प्रेषण, बधाई स्वीकार करें, अन्य साथियों की रचनाओं पर आपके विचारों का प्रतीक्षा है  |

कृपया ध्यान दे...

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