For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक भाई के दिल की पुकार ... ओ मेरी लाडली बहन

ओ मेरी लाडली बहन, ओ मेरी माँ जाई,
तुझ पे कुर्बान है सदा, तुम्हारा ये भाई !

जहाँ में चाँद सितारे हैं कायम जब तक,
तेरा सुहाग भी अमर रहे सदा तब तक !

तुम्हारे गाँव से बस ठंडी हवा आती रहे,
जिंदगानी तुम्हारी यूँ ही मुस्कुराती रहे !

मेरे बाबा की मेरी माँ की निशानी तू है
मेरे कुनबे की शर्म-ओ-लाज की बानी तू है !

दिल ये कहता है कि मैं फिर से मनाऊँ तुझको ,
अपने कन्धों पे बिठा फिर से घुमाऊँ तुझको !

तुम्हारी कपडे की गुडिया बहुत रुलाती है,
मुझे बचपन की याद हर समय दिलाती है !

तेरे बच्चों को देखने को दिल तरसता है,
हरेक राखी पे ठंडी आह सदा भरता है !

अगली राखी में मेरे घर पे बस चली आना,
कुँवर जी को भी अपने साथ में लेकर आना !

Views: 976

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 25, 2010 at 2:03pm
भाई गणेश बागी जी, आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी, शमशाद भाईजान, पंकज त्रिवेदी भाई जी, नवीन चतुर्वेदी भाई जी, आनन्द वत्स जी, राणा प्रताप सिंह जी, रवि "गुरु" जी , मैं आप सब का दिल से शुकर्गुजार हूँ कि आपने मेरी तुकबंदी को पसंद किया !
Comment by Rash Bihari Ravi on August 25, 2010 at 1:13pm
in pantiyo ko padhane ke bad kuch kahne le liya bacha hi nahi hain sundar atisundar manmohak.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 24, 2010 at 1:28pm
योगी सर एक गाने की पंक्तियाँ याद आ रही है

सजना के घर चली जायगी जो बहना
होंठ हँसेंगे मेरे रोयेंगे दो नैना
रखिया के रोज बहना रानी को बुलाऊंगा
ले के आयेंगे दूल्हें राजा

आपको रक्षाबंधन की ढेरों शुभकामनाएं
Comment by Anand Vats on August 24, 2010 at 11:59am
भैया प्रणाम .. रक्षा बंधन की बहुत सारी बधाई और शुभकामनाये
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 24, 2010 at 10:53am
ओ मेरी लाडली बहन, ओ मेरी माँ जाई,
तुझ पे कुर्बान है सदा, तुम्हारा ये भाई !

बहुत बढ़िया प्रस्तुति आज राखी के अवसर पर.....आपको राखी के पावन पर्व की बहुत बहुत शुभकामना......
Comment by Pankaj Trivedi on August 24, 2010 at 10:12am
योगराजजी,
तुम्हारी कपडे की गुडिया बहुत रुलाती है,
मुझे बचपन की याद हर समय दिलाती है !
मेरे लिएँ प्रत्येक त्यौहार कष्टदायक होता है | आँखें बस में नहीं रहती, घर का एक कोना है जो मुझे अपनी आगोश में लेकर संभालता लेता है | मेरी पत्नी और दो बेटियों के सिवा कौन है...? रहने दो... मत पूछो आगे...
आपने व्यक्त किएँ हर भावों को जीया हूँ और उसी रंगों से खेला हूँ... वो मेरा अतीत है मेरे भाई.... !!
Comment by Shamshad Elahee Ansari "Shams" on August 24, 2010 at 9:10am
प्रभाकर जी, इस रचना में घर आंगन के वो तमाम रंग भर दिये हैं आपने जिन्हें हर इंसान जीता है, जी चुका है और जीता रहेगा..रक्षा बंधन पर इससे बेहतर क्या उपहार दे सकता है कोई भाई..किसी बहन को..!!!
साधुवाद स्वीकार कीजिये..!!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 24, 2010 at 9:00am
तुम्हारी कपडे की गुडिया बहुत रुलाती है,
मुझे बचपन की याद हर समय दिलाती है !

अब कुछ भी कहना उचित न होगा.
हम कितनी बड़ी कीमत चुका कर बड़े होते हैं. आज मुझे अपनी ’उस’ छोटी बहन की याद आ रही है.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 24, 2010 at 8:28am
इसे मैं रचना नहीं कहूँगा, क्यू की रचना तो रची जाती है, यह तो स्वाभाविक रूप से स्वतः उदगमित एक बड़े भाई के दिल का उदगार है जो सीधे ह्रदय को झंकृत कर देता है,
आदरणीय योगराज भईया ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार आपके भावना की क़द्र करता है, हम सभी धन्य है जो आप जैसा भाई हमारे बीच है, ईश्वर से प्रार्थना है कि आप कि छत्र छाया इस परिवार पर सदैव बनी रहे |
Comment by alok jha on August 24, 2010 at 7:35am
bhahut badhiya sir ji .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service