For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नर हूँ ना मैं नारी हूँ

नर हूँ ना मैं नारी हूँ, लिंग भेद पर भारी हूँ

पर समाज का हिस्सा हूँ मैं, और जीने का अधिकारी हूँ

 

जो है जैसा भी है रुप मेरा, मैंने ना कोई भेष धरा

अपने सांचें मे कसकर हीं, ईश्वर ने मेरा रुप गढ़ा 

माँ के पेट से जन्म लिया, जब पिता ने मुझको गोद लिया

मेरी शीतल काया पर ही, शीतल मेरा नाम दिया

 

जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, सबसे अलग मैं खड़ा हुआ

सबसे हट कर पाया खुद को, अंजाने तन मे बंधा हुआ

 

दिन बीते काया बदली, मेरी खुद की आभा बदली

बदन मेरा गठीला था पर, मेरी हर एक अदा बदली

 

तब मैंने खुद को समझाया, दिल को अपने बहलाया

जानकर असली काया अपनी, मैं थोड़ा ना शर्माया 

मर्द के जैसे मेरे बदन में, औरत कोई छुपी हुई थी

निखर गई अब चाल ढाल जो, मेरे अंदर दबी हुई थी

 

देखकर मेरी ऐसी हालत, माँ ने मुझको त्याग दिया

मैं ज़िंदा हूँ फिर भी लेकिन, मेरी चिता को आग दिया 

मां ने जब ठुकराया था, पिता साथ निभाया था

पर समाज के तानो से, उसका भी मन घबराया था

 

सब कहते थे की श्राप हूँ मैं, उनके पुर्व जन्म का पाप हूँ मैं

देखकर उनको ये लगता था, जैसे उनका संताप हूँ मैं

 

जो थे मेरे संगी साथी, अब सब मुझसे कतराते थे

साथ मेरे जो खेले थे, वो दूर से हीं मुड़ जाते थे 

मैं चौराहे पर मिलता हूँ, अब वहीं पर रहता हूँ

आती जाती सवारी को, बस आशीष बेचता रहता हूँ

पर इसमे मेरा दोष है क्या? मैंने तो ये तन ना मांगा था

जब उसने मन से स्त्री बनाया, तो तन भी स्त्री का देना था

मैं सच को ना ठुकराउंगा, तन से मन का हो जाउंगा

जो चाहे मुझसे नाता रक्खे, खुद से ग़ैर नही हो पाउंगा 

नर से थोड़ा कम हूँ मैं नारी से थोड़ा ज्यादा हूँ

दोनों का है हिस्सा मुझमे मैं दो नो आधा आधा हूँ

"मौलिक व अप्रकाशित" 

अमन सिन्हा 

Views: 62

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on December 10, 2022 at 5:34pm
वाह अच्छी भावाभिव्यक्ति ...दोनो का हिस्सा है मुझमें मैं दोनो हूं ...उनकी पीर उजागर करती अच्छी रचना।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Euphonic Amit and आशीष यादव are now friends
13 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
""ओबीओ लाइव तरही मुशाइर:" अंक-151 को सफल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक…"
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"इससे बढ़कर नहीं कुछ किसी के लिएजी रहे हैं सभी फैमिली के लिए 1"
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय दंडपाणी नाहक जी अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई आपको"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय जयनित जी बहुत शुक्रिया आपका सादर"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय Zaif जी बहुत शुक्रिया आपका, वाक़ई ग़ज़ल निखरी सुझाव से सादर"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय नाहक जी बहुत शुक्रिया आपका सादर"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय अमित जी बहुत शुक्रिया आपका,जी ज़रूर सादर"
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय आशीष जी ग़ज़ल पर अपना क़ीमती वक़्त देने का शुक्रिया"
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय शकूर जी बहुत शुक्रिया ये बात इस तरह विस्तार से समझाने के लिए,आभार सादर"
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय नीलेश जी आपका भी बहुत शुक्रिया  .. "
3 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय रचना जी बहुत शुक्रिया आपका"
3 hours ago

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service