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मन की मस्ती ,
तन की चाहत ,
आता हैं सावन ,
मिलती हैं राहत ,
रिमझिम रिमझिम ,
बरसे हैं बादल ,
तड़पे हैं दिल  ,
बेकरारी का आलम ,
पिया पिया बोले ,
मन का पपिहरा ,
होवे पागल मन ,
तडपाये जियरा ,
जब सावन आये ,
हरियाली लाये ,
मन मस्तिष्क  में ,
ख्याल ये लाये ,
मन की मस्ती ,
तन की चाहत ,
आता हैं सावन ,
मिलती हैं राहत ,

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Comment by Rash Bihari Ravi on July 17, 2011 at 1:01pm
dhanyabad atendra ji
Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on July 16, 2011 at 10:43am
सुन्दर रचना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
                                 अतेन्द्र कुमार सिंह 'रवि
Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on July 16, 2011 at 10:42am
गुरु जी सादर प्रणाम ,सावन के अईते मन में मस्ती जाग गइल अउर रिमझिम रिमझिम बादल बरसे लागल ता मन  तडपे लागल, पागल मन क पपिहरा तडपावे लागल अउर सावन का हरिआली देखिके आपके मन कहे लागल
                                                 मन की मस्ती ,
                                                 तन की चाहत ,
                                                 आता हैं सावन ,
                                                 मिलती हैं राहत , 
 
                                                   अतेन्द्र कुमार सिंह 'रवि'  
Comment by Rash Bihari Ravi on July 15, 2011 at 12:17pm
aapasabhi ko dhanyabad
Comment by Lata R.Ojha on July 15, 2011 at 12:05pm
सुन्दर अभिव्यक्ति रवि जी :)
Comment by satish mapatpuri on July 14, 2011 at 11:46pm
तन - मन और सावन ------------------ गुरूजी, आपकी यह रचना मन को तरोताजा करने में  समर्थ है. बधाई.
Comment by Neelam Upadhyaya on July 13, 2011 at 10:49am
Bahut sunder.
Comment by डॉ. नमन दत्त on July 12, 2011 at 5:54pm
सुन्दर रचना रवि जी...
Comment by Rash Bihari Ravi on July 12, 2011 at 1:14pm
dhanyabad bagi ji and madhu ji

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 12, 2011 at 9:30am
खुबसूरत लाजबाब

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