For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुनते आए थे कि घूरे के भी दिन बदलते हैं 

देख लिया कि वक़्त के पहिये भी दिशा बदलते हैं 

और घर होते हैं घर ,घरों के भी दिन बदलते हैं

देख लिया 

 

ख़ालीपन निशब्द घरों में शब्दों ने फिर फेरे डाले हैं

फिर से चमके चौके चूल्हे  सावनों ने घेरे डाले हैं

देश परदेशो से लौटे, सँभले  से व्यवहार हैं

मैले मुख कस कमर मुखरित पहले से ये उद्गार है

देख लिया 

भरे घर वीरान कर,कुल देवों का अपमान कर 

स्वर्णमृग छल और बल से ले गया था जब शहर  

कांधे लग बरगद के पीपल हूकों भर रोया था जितना 

पगलाए पनघट को निज अश्रु से धोया कितना कितना

ओढ़ चादर   वीराने  की  पगडंडी  ने चेहरा ढांपा था

दादा की बूढ़ी थी आंखे सारा कुछ पर भाँपा था

देख लिया था दूर तक

 

व्यर्थ सी अब ब्याह - बारातें , कराहती किलकारियाँ

फीकी दीपावली की रातें, तितलियों बिन  क्यारियाँ

गुमगुम रहने लगा था गाँव ,शहरी होने लगे थे पाँव

बंद घरों में घुट रही थी , सूरज की रूठी रूठी  छांव

अर्थ-शब्द विस्थापन के किस्से, अनकही अनसुनी कथाएँ

खेत खलिहानों के  हिस्से, घर -घरौंदों की व्यथाएं

जब अर्थहीन होने को आई ,पीर  जब हृदय समाई

ख़ालीपन निशब्द घरों में, दुआ से दुआ ने गुहार लगाई  

 

जीवन है जीवन आखिर

महज़  रोटी कपड़े से ही तो नहीं बसर होता है

सुनते तो यही थे कि दुआओं मे असर होता है 

 

देख लिया 

सो गई शहर की सदियाँ,गाँव का पहर जाग गया

ख़ालीपन निशब्द घरों में शब्द सा जादू फैल गया

.

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 278

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on July 18, 2020 at 4:36pm

आद0 अमिता तिवारी जी सादर अभिवादन। बढ़िया सृजन हुआ है। भावपूर्ण और अर्थपूर्ण। बधाई स्वीकार कीजिये

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
1 hour ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service