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फूलों को दिल से उगाता कोई

फूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।१।

है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लो

काम बनते ही हक़ को जताता कोई।२।

फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगर

उनके जैसी खुशी काश लाता कोई।३।

रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगर

फूलों सी ताजगी क्या दिलाता कोई।४।

फूल खुद टूट के भी हैं देते खुशी

उनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।५।

फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगर

फूल सा सब्र खुद में ले आता कोई।६।

खुद की कीमत पे औरों को देना खुशी

काश फूलों से ये सीख पाता कोई।७। 

आदमी आदमी से करे बस वफा 

बेवफाई को दिल से भगाता कोई।८।

फूल हरदम खिलें जिन्दगी में मगर

फूल अरमां में शायद समाता कोई।९।

  मौलिक एवं अप्रकाशित    

        अवनीश 

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Comment by Sushil Sarna on August 22, 2022 at 12:29pm
वाह आदरणीय बहुत सुंदर प्रस्तुति

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