For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – June 2014 Archive (7)

मिला जो, कब खुशी उससे समेटी यार लोगों ने - ग़ज़ल

********************************************

1222 1222 1222 1222

********************************************

जनम से आदमी हो, आदमी क्यों हो नहीं पाया

कि नफरत से भरे दिल में मुहब्बत बो नहीं पाया

***

सितारे तोड़ डाले सब, करम उसका यही है बस

खता मेरी रही इतनी कि जुगनू हो नहीं पाया

***

मिला जो, कब खुशी उससे समेटी यार लोगों ने

उसी का गम जिगर को है जमाने जो नहीं पाया

***

तुझे क्यों खांसना उसका दिनों में भी अखरता है

पिता जो तेरे बचपन में… Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 29, 2014 at 4:34pm — 11 Comments

शरारत गर न करते तो - ग़ज़ल

1222    1222    1222    1222

********************************

भला हो या बुरा हो बस, शिकायत  फितरतों में है

वो ऐसा शक्स है  जिसकी बगावत  फितरतों में है

**

रहेगा साथ  जब तक वो  चलेगा  चाल उलटी ही

भले  ही  दोस्तों  में  वो, अदावत  फितरतों में है

**

उसे लेना  नहीं  कुछ  भी  बड़े   छोटे  के होने से

खड़ा हो  सामने जो भी, नसीहत  फितरतों में है

**

हुनर  सबको  नहीं  आता  हमेशा  याद  रखने का

भुलाए वो किसी को  क्या, मुहब्बत फितरतों में है…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 26, 2014 at 11:00am — 25 Comments

जोड़ना आता नहीं पर बाँटनें की फितरतें -ग़ज़ल

2122    2122    2122    212

******************************

पाँव  छूना  रीत  रश्में  मानता  अब  कौन  है

सर पे आशीषों  की छतरी तानता  अब कौन है

***

जोड़ना  आता  नहीं पर ,  बाँटनें   की  फितरतें

धर्म हो  या  हो सियासत  जानता अब  कौन है

***

रो रहे क्यों वाक्य को तुम  मानने की जिद लिए

शब्द  भर  बातें  सयानों  मानता  अब  कौन है

***

सिर्फ दौलत  को यहाँ  पर रोज  भगदड़ है मची

प्यार की  खातिर  मनों को  छानता अब कौन है

***

सबको…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 23, 2014 at 11:30am — 31 Comments

फुसफुसाहट नफरतों की तेज फिर होने लगी - ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

**************************

एक भी उम्मीद उन  से  तुम न पालो दोस्तो

रास्ता  इन  बीहड़ों  में  खुद  बना  लो दोस्तो

***

बंद दरवाजे जो  दस्तक से  नहीं खुलते कभी

इंतजारी  से  तो  अच्छा  तोड़  डालो  दोस्तो

***

फुसफुसाहट नफरतों की तेज फिर होने लगी

प्यार का परचम  दुबारा तुम उठा लो दोस्तो

***

होश में तो  कह  रहे  थे ‘साथ  हम तेरे खड़े’

गिर रहा मदहोशियों  में अब सॅभालो…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 21, 2014 at 9:30am — 18 Comments

महज पाना किसी को भी मुहब्बत तो नहीं होती - ग़ज़ल

*******

1222 1222 1222 1222

*******

हुआ    जाता    नहीं   बच्चा   कभी   यारो   मचलने   से

नहीं    सूरत    बदलती   है   कभी   दरपन   बदलने   से

***

जला  ले  खुद  को  दीपक  सा  उजाला   हो   ही  जायेगा

मना   करने   लगे   तुझको  अगर  सूरज  निकलने  से

***

हमारी   सादगी   है   ये   भरोसा   फिर   जो   करते   हैं

कभी  तो  बाज  आजा  तू  सियासत  हमको  छलने  से

***

बता  बदनाम  करता  क्यों  पतित  है  बोल अब…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 16, 2014 at 9:26am — 14 Comments

मोह माया मत समझ संसार को - ग़ज़ल

2122    2122   212

*********************

तन  से  जादा  मन  जरूरी  प्यार को

मन  बिना  आये हो क्या व्यापार को

***

मुक्ति  का  पहला  कदम  है  यार ये

मोह  माया  मत  समझ  संसार को

***

इसमें   शामिल  और  जिम्मेदारियाँ

मत समझ मनमर्जियाँ अधिकार को

***

डूब कर  तम में  गहनतम भोर तक

तेज   करता   रौशनी  की   धार  को

***

तब कहीं  जाकर  उजाला  साँझ तक

बाँटता   है   सूर्य   इस   संसार …

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 12, 2014 at 9:42am — 21 Comments

गिड़गिड़ाने से बची कब लाज तेरी द्रोपदी-ग़ज़ल

2122    2122    2122    212

***

शब्द   अबला  तीर  में  अब  नार  ढलना  चाहिए

हर दुशासन का कफन  खुद तू ने  सिलना चाहिए

***

लूटता  हो  जब  तुम्हारी  लाज  कोई  उस समय

अश्क  आँखों   से  नहीं  शोला  निकलना  चाहिए

***

गिड़गिड़ाने   से   बची   कब   लाज  तेरी  द्रोपदी

वक्त पर उसको सबक कुछ ठोस मिलना चाहिए

**

हर समय तो आ नहीं सकता कन्हैया तुझ तलक

काली बन खुद  रक्त  बीजों  को  कुचलना चाहिए

**

फूल बनकर  दे महक  उपवन को  यूँ तो  रोज तू…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 6, 2014 at 12:47pm — 31 Comments

Monthly Archives

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Chetan Prakash commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"आदाब, मैं आदरणीय समर कबीर साहब से सहमत हूँ, आपकी ग़ज़ल की सम्प्रेषणीयता वास्तव में अद्भुत है! बाकी…"
14 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"//जनाब निलेश जी की टिप्पणी मुझे नज़र नहीं आ रही है, कुछ देर पहले तक तो थी?// जी मुहतरम मैं भी निलेश…"
14 hours ago
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"जनाब अमुरुद्दीन साहिब, जनाब निलेश जी की टिप्पणी मुझे नज़र नहीं आ रही है, कुछ देर पहले तक तो थी?"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"जनाब निलेश `नूर` साहिब आदाब, बहुत समय बाद ओबीओ पर एक अच्छी ग़ज़ल पढने को मिली इसके लिये आपका शुक्रीय:…"
15 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"मुहतरम निलेश 'नूर' जी, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
15 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222     1222      122   मिलेगा और  मिल  कर रो पड़ेगामुझे  देखेगा  तो  घर  रो  पड़ेगा न जाने क्यों…See More
16 hours ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"//तानाफुर में जब पढने में दिक्कत हो तब दोष जायज़ है// भाई, मैं तो जानता हूँ :-)))"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"आ. समर सर,तानाफुर में जब पढने में दिक्कत हो तब दोष जायज़ है... फिर रोक दिया गया.. में ज़बान परमिट…"
22 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तमन्नाओं को फिर रोका गया है
"धन्यवाद आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,फिर रोका गया में तानाफुर इसलिए नहीं माना जाएगा क्यूँ कि यह ज़बान में…"
22 hours ago
Samar kabeer commented on नाथ सोनांचली's blog post विदाई के वक़्त बेटी के उद्गार
"जनाब नाथ सोनांच्ली जी आदाब , बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें…"
23 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी ग़ज़ल पे शिरकत और हौसलाफजाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया..."
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-रो पड़ेगा....बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय नीलेश जी...ग़ज़ल को बारीक नजर से परखने के लिए आपका हार्दिक आभार...मतले को लेकर आपका सुझाव बहुत…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service