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Nemichand Puniya's Blog (1)

Gazal

गजल

औरों पे कभी, बोझ न बन,
बहरहाल जाँ सोज न बन।


कायम इज्जत रखनी हो तो,
मेहमां किसी का रोज न बन।


जो किश्ती को ही ले डूबे,
दरिया की वो मौज न बन।


बगैर दावतनामा कभी,
कही शरीके-भोज न बन।


अपने गिरेबाँ में रहा करो ‘चंदन‘
बेखुदी में राजा भोज न बन।।

Added by Nemichand Puniya on March 11, 2011 at 8:00pm — 2 Comments

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