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सालिक गणवीर's Blog – January 2021 Archive (4)

तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा 

जो बुरा है वो भला हो जाएगा (1)

जो पुराना जख़्म माज़ी ने दिया

दो ही दिन में क्या नया हो जाएगा (2)

खाद पानी मिलने से ही क्या शजर

वक़्त से पहले बड़ा हो जाएगा (3)

है अलग सबसे ख़ज़ाना प्यार का

ख़र्च कीजै दोगुना हो जाएगा (4)

दोस्ती में दर्द-ओ-ग़म हो या ख़ुशी

जो भी तेरा है मेरा हो जाएगा (5)

क़द अगर छोटा है उसका दोस्तो

मैं झुका तो वो बड़ा…

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Added by सालिक गणवीर on January 29, 2021 at 10:30pm — 11 Comments

एक पत्थर सा बस पड़ा हूँ मैं......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

एक पत्थर सा बस पड़ा हूँ मैं

हूँ मुसाफ़िर या रास्ता हूँ मैं (1)

अब कोई ढूँढता नहीं मुझको

एक मुद्दत से लापता हूँ मैं (2)

ज़िंदगी आजकल जहन्नम है

ख़्वाब जन्नत के देखता हूँ मैं (3)

छोड़ कर सब चले गए हैं या

भीड़ में फिर से खो गया हूँ मैं (4)

अब नहीं इंतिज़ार तेरा पर

रास्ता रोज़ देखता हूँ मैं (5)

हर तरफ है अजीब वीरानी 

खुद में शायद उजड़ रहा हूँ मैं…

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Added by सालिक गणवीर on January 15, 2021 at 8:00pm — 8 Comments

होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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होता नहीं है ख़त्म मेरा काम भी कभी

कैसे करे ये दिल बता आराम भी कभी  (1)

अब हो न जाँऊ यार मैं बदनाम भी कभी

हो जाए मुफ्त में न मेरा नाम भी कभी  (2)

क्या क्या चुरा लिया है ये मुझसे न पूछिये

लूटा गया है मुझको सर-ए-आम भी कभी  (3)

कुछ इस तरह से छोड़ गए हैं मुझे यहाँ

आते नहीं हैं मुद्दतों पैगाम भी कभी  (4)

करते रहे हवाई सफ़र मुफ़्त में सदा

कुछ लोग तो चुकाते नहीं दाम भी कभी …

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Added by सालिक गणवीर on January 10, 2021 at 11:00pm — 6 Comments

उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

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उसे पहले कभी देखा नहीं था

वो दिल के पास जो रहता नहीं था  (1)

लगी है शह्र की इसको हवा अब

हमारा गाँव तो ऐसा नहीं था  (2)

बहुत कुछ बोलती थीं आँखें उसकी

ज़ुबाँ से वो कभी कहता नहीं था  (3)

अँधेरों ने रखा था क़ैद जब तक

उजाला दूर तक फैला नहीं था  (4)

न जाने क्या हुआ भरता नहीं है

पुराना घाव तो गहरा नहीं था  (5)

वही तन कर खड़ा रहता है आगे

कभी जो सामने बैठा नहीं…

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Added by सालिक गणवीर on January 1, 2021 at 2:30pm — 6 Comments

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