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DINESH KUMAR VISHWAKARMA
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DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन स्वीकार करें raktale जी । की/का इंगित करने व हौसला बढ़ाने हेतु आभार।"
Jun 19
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम जी सादर नमस्कार। बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय।"
Jun 19
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"माना सफ़र ये, लाजिमी है, पास हो या दूर ।जाना मगर क्यों, जान पर ही, खेल कर भरपूर ।।ऐसा समय ही, आ गया हो, आप हों मजबूर ।लेकिन पलट मत, दीजिएगा, राह का दस्तूर ।। थी बैलगाड़ी, और नाना, संग बच्चे सात ।तकते सितारे, चाँद को सब, थी सलोनी रात ।।बाज़ार मेला, या…"
Jun 19
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन धामी जी। छंद पर प्रोत्साहित करने हेतु बहुत बहुत आभार आपका।"
May 22
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर नमन आपको आदरणीय । बहुत बहुत आभार आपका ।"
May 22
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय धामी sir। सादर अभिवादन स्वीकार करें। चित्र अनुरूप छंद पर बहुत अच्छी रचना है, आदरणीय।आपको बधाई।"
May 22
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी।नमस्कार। चित्र अनुरूप अच्छी छंद रचना हेतु हार्दिक बधाई।"
May 22
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"कामरूप छंद लो बन गई है, आज अपनी, धाक पर सरकार ।सामर्थ्य है फिर, क्या किसी में, जो सके ललकार ।।जीता समर ये, जान पर ही, झेल कर हर वार ।ये खेल भय का, है समझ लो, इस जगत का सार ।। जाहिल कहो या, आज बर्बर, न मानो इन्सान ।लेकिन कहाँ हो, भागते तुम, मुल्क…"
May 21
DINESH KUMAR VISHWAKARMA posted a blog post

ग़ज़ल

ग़ज़ल1222/1222/1222/1222वही जज़्बा वही लहजा लिए अख़बार आता है मगर उस हादसे से क्यूँ परे अख़बार आता है ।चुनावी दौर के वादे मुकम्मल हो न हो लेकिन तुम्हे भी हो ख़बर घर पर मेरे अख़बार आता है ।जो भर्तियाँ अटकी हैं उनका क्या हुआ होगा अभी तो कोर्ट से लड़ते हुए अख़बार आता है ।यकीनन सच को ही तो सामने आना जरूरी था अगरचे झूठ के नीचे दबे अख़बार आता है ।जो उनके पैरहन का रंग भी चर्चा में आ जाए यहाँ मातम को भी लगने लगे अख़बार आता है ।जवानी भेंट चढ़ जाए अभी कुछ इश्तिहारों में बुढ़ापा और कट जाया करे अख़बार आता है ।नए शहरों…See More
Mar 2
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"जी जरूर अमल करूँगा आपकी इस्लाह पर। सादर नमन आपको आदरणीय।बहुत बहुत आभार आपका।"
Feb 26
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सादर नमन। ninth शे'र पसन्द आया।अच्छी ग़ज़ल हुई आदरणीय।"
Feb 26
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सादर नमन आपको ।बहुत सुंदर ग़ज़ल है, आदरणीय। "
Feb 26
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"सम्माननीय धामी जी, बहुत बहुत शुक्रियः आपका। आपको सादर नमन।"
Feb 26
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आदरणीय methani ji सादर अभिवादन।बहुत बहुत शुक्रियः"
Feb 26
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आदरणीय अभिवादन स्वीकार करें। ग़ज़ल तक आने व हौसला बढ़ाने हेतु आभार आपका।"
Feb 26
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आदरणीय कबीर जी आपको सादर नमन। ग़ज़ल पर इस्लाह हेतु बहुत बहुत शुक्रियः आपका।"
Feb 26

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Gender
Male
City State
kondagaon
Native Place
kondagaon
Profession
teacher
About me
poet

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ग़ज़ल

ग़ज़ल

1222/1222/1222/1222

वही जज़्बा वही लहजा लिए अख़बार आता है

मगर उस हादसे से क्यूँ परे अख़बार आता है ।

चुनावी दौर के वादे मुकम्मल हो न हो लेकिन

तुम्हे भी हो ख़बर घर पर मेरे अख़बार आता है ।

जो भर्तियाँ अटकी हैं उनका क्या हुआ होगा

अभी तो कोर्ट से लड़ते हुए अख़बार आता है ।

यकीनन सच को ही तो सामने आना जरूरी था

अगरचे झूठ के नीचे दबे अख़बार आता है ।

जो उनके पैरहन का रंग भी चर्चा में आ जाए

यहाँ मातम…

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Posted on March 1, 2022 at 6:00pm

 
 
 

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भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२*जब कोई दीवानगी  ही  आप ने पाली नहींजान लो ये जिन्दगी भी जिन्दगी सोची नहीं।।*पात…See More
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gumnaam pithoragarhi posted a blog post

गजल

212  212  212  22 इक वहम सी लगे वो भरी सी जेब साथ रहती मेरे अब फटी सी जेब ख्वाब देखे सदा सुनहरे दिन…See More
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