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केवल प्रसाद 'सत्यम''s Blog – December 2013 Archive (2)

शान ज्यों माणिक मुक्ता

कुण्डलियां-1


कुत्ता प्यारा जीव है, वफादार बलवान।
घर की  नित रक्षा करे, रख पौरूष अभिमान।।
रख पौरूष अभिमान, गली का शेर कहाए।
चोर और अंजान, भाग कर जान बचाए।।
द्वार रहे गर श्वान, शान ज्यों माणिक मुक्ता।
पर मानव मक्कार, अहम वश कहता कुत्ता।।


के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 19, 2013 at 7:00pm — 23 Comments

!!! चाल ढार्इ घर चले अब !!!

!!! चाल ढार्इ घर चले अब !!!

बन फजल हर पल बढ़े चल,

दासता के देश में अब।

रास्ते के श्वेत पत्थर

मील बन कर ताड़ते हैं

दंग करती नीति पथ की,

चाल ढार्इ घर चले अब।1

भूख पीड़ा सर्द रातें

राह पर अब कष्ट पलते

भ्रूण हत्या पाप ही है

राम के बनवास जैसा

साधु पहने श्वेत चोला

चाल ढार्इ घर चले अब।2

रोजगारी खो गर्इ है

रेत बनकर उड़ चुकी जो

फिर बवन्डर घिर रहा है

घूस खोरी सी सुनामी

दर-बदर अस्मत हुर्इ पर

चाल…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 18, 2013 at 7:08pm — 15 Comments

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