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Tarlok Singh Judge
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Ferozepur Punjab
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Ferozepur
Profession
Lawyer
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Writing in Punjabi

Tarlok Singh Judge's Blog

ग़ज़ल

ग़ज़ल

by Tarlok Singh Judge

गिर गया कोई तो उसको भी संभल कर देखिये

ऐसा न हो बाद में खुद हाथ मल कर देखिये



कौन कहता है कि राहें इश्क की आसन हैं

आप इन राहों पे, थोडा सा तो चल कर देखिये



पाँव में छाले हैं, आँखों में उमीन्दें बरकरार

देख कर हमको हसद से, थोडा जल कर देखिये



आप तो लिखते हो माशाल्लाह, बड़ा ही खूब जी

कलम का यह सफर मेरे साथ चल कर देखिये



क्या हुआ दुनिया ने ठुकराया है, रोना छोडिये

बन के सपना, मेरी आँखों में मचल कर… Continue

Posted on September 17, 2010 at 9:27pm — 2 Comments

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At 9:46am on February 24, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 12:11pm on February 23, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY TARLOK SAHAB........
At 12:10am on September 19, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 6:07pm on September 18, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:35pm on September 17, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 9:15pm on September 17, 2010, Admin said…

 
 
 

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