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राज़ नवादवी's Discussions (490)

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"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, बेहद शुक्रिया आपका. "

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय जनाब समर कबीर साहिब, इस्लाह का बेहद शुक्रिया मुहतरम, बहुत जल्दी में कही गई ग़ज़…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"2122-1122-1122-22/112   चोट खा खा के कोई फ़र्द बशर बनता है रिज़्क़ जब गलता है पानी में,…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय  dandpani nahak जी, वाह वह बहुत अछा प्रयास  इल्तिज़ा है कि सभी लोग घरों में ह…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

" आदरणीया Rachna Bhatia जी,  अछा प्रयास है. जीस्त का यूँ ही नहीं यारो कवर बनता है आ…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"जनाब Khan Hasnain Aaqib साहिब, वाह वाह मतला सुन्दर है,  वक़्त बदले तो हर एक ज़ेर ज…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"आदरणीय सूबे सिंह सुजान  साहिब, वाह वाह, बहुत अच्छा प्रयास, बधाई स्वीकार करें.  जितन…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

" आदरणीय Md. Anis arman, साहिब, वाह वाह बहुत खूब भाई, क्या कहने  2)जड़ पकड़ लेता है ये…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"वाह वाह जनाब  Tasdiq Ahmed Khan साहिब, क्या कहने, बधाई हो  ग़म भी पड़ते हैं मुहब्बत…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

"वाह वाह जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहिब, बहुत ख़ूब,  जिसने औरों का बचाया है हमेशा ज…"

राज़ नवादवी replied Mar 28, 2020 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117

171 Mar 28, 2020
Reply by Samar kabeer

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Gurpreet Singh jammu commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । मात्र दिवस पर मां को समर्पित बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आप ने ।…"
3 hours ago
विनय कुमार posted a blog post

हम क्यों जीते हैं--कविता

हम सांस लेते हैं, हम जीते हैं और एक दिन आखिरी सांस लेते हैं इस आखिरी सांस के पहले हमारे पास वक़्त…See More
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
12 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"ख्याल बहुत उम्दा हैं गज़ल में। हार्दिक बधाई, भाई लक्ष्मण जी।"
17 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आपकी यह गज़ल पढ़ कर भी आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, मेरे भाई, लक्ष्मण जी।"
17 hours ago
vijay nikore commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सामयिक स्थिति इंगित करती यह गज़ल अच्छी बनी है, भाई लक्ष्मण जी। हार्दिक बधाई।"
17 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ धामी सर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये सर मुझे कुछ अच्छा सूझ…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता)…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनजाना उन्माद
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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