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नयना(आरती)कानिटकर's Discussions (929)

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"आ.वीर जी बहुत सार्थक रचना कही है आपने. कथनी और करनी में  अभी भी भेद है. वाह! वाह! बध…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
Reply by surender insan

"आ.नीता जी वाकई आजकल बच्चों को क्या हो गया हैं समझ से परे है,संयम नाम की कोई चिज ही न…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"सुनीता जी सुंदर प्रतिकात्मक रचना. बधाई"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"आ. चन्द्रेश जी आपकी प्रतिकात्मक लघुकथा पर क्या कहूँ शब्द ही नहीं मिल रहे .इतना तो कह…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"धन्यवाद अनुपमा जी"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"आभार सर"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"शशी तुम्हे रचना पसंद आई. इस हेतु धन्यवाद"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"आ. विरेन्द्र जी आपकी टिप्पणी से हौसला अफ़जाई होती हैं सो हमेशा प्रतिक्षा रहती है. धन्…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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" आ.रवी दादा. पिछली संगोष्ठी मेम विषय या कथानक चयन हेतु आपने  सतर्कता बरतने के लिए जो…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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"वसुधा जी शीर्षक चयन मेरी कमजोरी है. इस पर अब अभ्यास की जरुरत है. आपने रचना को मान दि…"

नयना(आरती)कानिटकर replied Aug 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)

1092 Aug 31, 2017
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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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Sushil Sarna posted a blog post

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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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