For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी
इस चमन में साथ साथ फूल भी हैं ख़ार भी
**
देखते बदलते रंग मौसमों के इश्क़ में
हिज्र की ख़िज़ाँ कभी विसाल की बहार भी
**
इंतज़ार की घड़ी नसीब ही नहीं जिसे
क्या पता उसे है चीज़ लुत्फ़-ए-इंतिज़ार भी
**
कीजिये सुकून चैन की न बात इश्क़ में
इश्क़ में क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी
**
चश्म इश्क़ में ज़ुबान का हुआ करे बदल
जो शरर बने कभी कभी है आबशार भी
**
प्यार एक फ़लसफ़ा है और नैमत-ए-ख़ुदा
रंज़ है इसे बनाते लोग कार-ओ-बार भी
**
इश्क़ जो करे जनाब रूह से उसे नसीब
अज्मल-ए-जहान और ज़बीन पर निखार भी
**
ख़ौफ़ दिल में है अगर तो दूर इश्क़ से रहें
इश्क़ के नसीब में लिखी गई है दार भी
**
प्यार का वक़ार और दबदबा रहे ख़ुदा
इल्तज़ा 'तुरंत' की है वक़्त की पुकार भी
**
गिरधारी सिंह गहलोत तुरंत' बीकानेरी |

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 205

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 5, 2019 at 4:38pm

आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी ,हौसला आफजाई के लिए शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 5, 2019 at 11:42am

आदरणीय गिरधारी भाई , खूब सूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाईयाँ

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 25, 2019 at 2:27pm

आदरणीय  Samar kabeer  साहेब ,आपकी इस्लाह बहुत ही पुरअसर है और मिसरे को वाजिब अर्थ देने के लिए आवश्यक भी | संशोधन कर रहा हूँ | सादर आभार एवं नमन | इसी तरह कृपा बनायें रखें | 

Comment by Samar kabeer on June 25, 2019 at 11:50am

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'हिज्र है विसाल भी है वस्ल और है तड़प'

इस मिसरे का शिल्प बहुत कमज़ोर है,आप जो कहना चाहते हैं,बयाँ नहीं हो रहा,इसे बदलने का प्रयास करें ।

'इश्क़ बा-क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी'

इस मिसरे में 'बा क़रार'शब्द मुनासिब नहीं,मिसरा  यूँ कर सकते हैं:-

इश्क़ में क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी' 

'जो शरर बने कभी कभी हैं आबसार भी'

इस मिसरे में 'हैं' को " है" कर लें,और 'आबसार' शब्द ग़लत है,सहीह शब्द है "आबशार"

'इश्क़ रूह से करें फ़क़त उन्हें नसीब हो'

इस मिसरे को यूँ कर लें तो बात साफ़ हो जाएगी:-

इश्क़ रूह से करें  जो उनको ही नसीब हो'

'इश्क़ में लिखी नसीब में किसी के दार भी'

इस मिसरे को यूँ कर लें तो बात साफ़ हो जाएगी:-

'इश्क़ के नसीब में लिखी गई है दार भी'

बाक़ी शुभ शुभ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post आज कल झूठ बोलता हूँ मैं
"प्रिय रुपम कुमार  अच्छी ग़ज़ल हुई है. बधाईयां स्वीकार करो.गुरु जनों की इस्लाह पर अमल करते…"
55 minutes ago
सालिक गणवीर commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"प्रिय भाई मनोज एहसास जी सादर नमस्कार शानदार ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें. दिल में कोई भीड़ सलामत…"
1 hour ago
Anil Kumar Singh left a comment for Anil Kumar Singh
"ग्रुप के माननीय सदस्यों एवं पदाधिकारियों का अभिनंदन  सादर , अनिल कुमार सिंह भा.पु.से (से.नि)"
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन क्या खूब दोस्ती यहाँ तूफान कर गए.।वाह एक और अच्छी ग़ज़ल के…"
1 hour ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल-आ गई फिर से मुसीबत मेरे सर पर कम्बख्त
"आदरणीय राम अवध विश्वकर्मा जी, आदाब। दमदार अश'आ़र से मुज़ैय्यन शानदार ग़ज़ल हुई है। बधाई…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय बबिता गुप्ता जी। बेहतरीन लघुकथा। अभी निकट भविष्य में घटी एक मार्मिक घटना पर…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'लाख कोशिशें कर के माना…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल-आ गई फिर से मुसीबत मेरे सर पर कम्बख्त
"जनाब राम अवध जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । कमबख्त बन के तूफान चला आया शहर…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आ. भाई गणेष जी बागी जी, बेहतरीन कथा हुई हैै ।  हार्दिक बधाई। "
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिल के ज़ख़्म को शे'र सुनाकर सीता है
"अमीरुद्दीन खा़न "अमीर साहब जी आपका बहुत शुक्रिया जो आपने यह बताया, इतनी गहराई से कोई उस्ताद ही…"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service