For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सीमा पार से आके तुमने हमको जो ललकारा है

भागो तुम उस पार चलो यह भारतवर्ष हमारा है।

आये दिन जो तुम करते रहते हो उत्पात यहां

अब हम नहीं सहेंगे यह सब यह संकल्प हमारा है।

ऐसा क्या व्यवहार तुम्हारा जो कहके जाते हो पलट

अपनी सीमा पर है नहीं नियंत्रण यह दुर्भाग्य तुम्हारा है।

सरहद पर जो आते हैं करते स्वागत है हम उन का

मित्र तुम्हारे चरणों में यह झुका शीश हमारा है।

आये हो तो रहो यहां होकरके निर्भीक मगर

धोखा देने वालों पर गिरता फिर खड्ग हमारा है।

कहीं तुम्हारे मन भी तो आया है छल कपट नहीं

ऐसा अगर इरादा है फिर नहीं भला तुम्हारा हैं।

साफ दिल से करो मित्रता ऐसी प्रीत निभाओ तुम

एक देश की कौन कहे सारा संसार तुम्हारा है।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 238

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on October 16, 2016 at 4:42pm
भावपूर्ण रचना पर मेरी बधाई स्वीकार करें
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 16, 2016 at 3:24pm
नमस्कार
सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Samar kabeer on October 16, 2016 at 3:14pm
आदाब,
ये किस विधा की रचना है ?
इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, धन्यवाद।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, सराहना व सलाह के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"दोहा छन्द --------- विचलित होता सत्य कब, पथ की मुश्किल देखवह  बढ़ता  नित …"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"माननीय संचालक महोदय, सादर अभिवादन।"
2 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
""ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126 में आप सभी का स्वागत है..."
9 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

चेहरे पर मुस्कान बनाकर बैठे हैं (ग़ज़ल)

22 22 22 22 22 2.चेहरे पर मुस्कान बनाकर बैठे हैंजो नकली सामान बनाकर बैठे हैंदिल अपना चट्टान बनाकर…See More
10 hours ago
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी

22 22 22 22 22 22 22 22इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगीना दिल से सियाही निकलेगी ना सांस…See More
14 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

मन पर दोहे ...........

मन पर दोहे ...........मन माने तो भोर है, मन माने तो शाम ।मन के सारे खेल हैं, मन के सब संग्राम ।…See More
14 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"//क्योंकि सड़े हुए या खराब खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण अक्सर खट्टा स्वाद होता…"
17 hours ago
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कौन आया काम जनता के लिए- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सादर प्रणाम आदरणीय धामी सर ग़ज़ल बेहद भावपूर्ण है और निखर जायेगी अगर मतले का सानी स्पष्ट हो गया…"
19 hours ago
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सादर प्रणाम गुरु जी वाकई आपके बिन इस मंच का ग़ज़ल वाला हिस्सा तो बिल्कुल ही सूना हो गया है सादर"
20 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"जैसा कि कड़वाहट के साथ होता है, खट्टे का पता लगाना अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उन…"
20 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service